बांदा। सकल हिंदू समाज के तत्वावधान में आयोजित विशाल ‘हिंदू सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), कानपुर प्रांत के प्रचार प्रमुख डॉ. अनुपम ने हिंदू समाज की एकजुटता और आंतरिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आज वह किसी पद या संगठन के प्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि एक स्वाभिमानी हिंदू के रूप में समाज के सामने अपनी बात रखने आए हैं।
जागृति की आवश्यकता और ऐतिहासिक संदर्भ
सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संघ 100 वर्षों से समाज को संगठित कर रहा है, लेकिन शताब्दी वर्ष में भी ‘हिंदू सम्मेलन’ की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि हिंदू समाज को अपनी पुरानी शक्ति, ज्ञान और संस्कृति का पुन: स्मरण कराना जरूरी है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए प्रश्न किया कि आखिर हमारे मंदिर क्यों टूटे और पुस्तकालय क्यों जलाए गए? उन्होंने कहा कि यह जागृति आने वाले संकटों को पहचानने के लिए अनिवार्य है।
‘लैंड जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ पर प्रहार
प्रान्त प्रचार प्रमुख ने वर्तमान चुनौतियों का जिक्र करते हुए लैंड जिहाद और लव जिहाद जैसे विषयों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कानपुर के चमनगंज क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार वहां हिंदू बस्तियों के पलायन के बाद मंदिरों में दुकानें खोल दी गईं और शिवलिंग के ऊपर कूड़ा भरा गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हिंदू समाज अब भी नहीं जागा, तो आने वाले समय में स्थिति और विकट हो सकती है।
जातिवाद के षड्यंत्र को समझने की अपील
समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव पर बोलते हुए उन्होंने इसे एक गहरा षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा:
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हिंदू समाज में आज लगभग 6000 जातियां हैं, जिनका वर्णन न पुराणों में है, न उपनिषदों में और न ही रामायण या गीता में।
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यह जातियों का जाल हिंदू शक्ति को छिन्न-भिन्न करने के लिए बुना गया है।
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यदि समाज जागरूक नहीं हुआ, तो हिंदू विरोधी ताकतें इन 6000 जातियों को 60,000 में बदल देंगी।
उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा, “पहलगाम में जो लोग मारे गए थे, वे जाति पूछकर नहीं मारे गए थे। जब हिंदू ही नहीं बचेगा, तो मंदिरों में पूजा कौन करेगा?”
एकजुटता का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे अपनी जाति का अभिमान भले ही रखें, लेकिन यह कभी न भूलें कि वे ‘पहले हिंदू’ हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम 10 हिंदू परिवारों तक जाए और उन्हें संगठित होने का महत्व समझाए। उन्होंने कहा कि दो लोगों के आपसी झगड़े को भी जातिगत रंग देना हिंदू विरोधी ताकतों की सोची-समझी रणनीति है, जिसे विफल करना होगा।
मुख्य अंश: “हिंदू रहेंगे तो मंदिर रहेंगे, हिंदू संस्कृति रहेगी और सभ्यता बचेगी। इसीलिए यह हिंदू जागृति का महाकुंभ है।”

