एक आवाज पर एक साथ चलते हैं लाखों स्वयंसेवक: जगदीश प्रसाद जी

• कानपुर के शास्त्री नगर में RSS द्वारा ‘स्वर शतकम’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन
• डॉ. अम्बेडकर की जयंती पर घोष वादकों ने निकाला पथ संचलन
• शताब्दी वर्ष में समाज से ‘पंच परिवर्तन’ को अपनाने का आह्वान

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कानपुर: RSS स्वयंसेवकों ने घोष की मधुर धुन पर बाबा साहब को किया नमन, सेवा बस्ती में गूंजे अंबेडकर के विचार

कानपुर। भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आज मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कानपुर विभाग के स्वयंसेवकों द्वारा उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस उपलक्ष्य में कंपनी बाग चौराहे पर स्थित बाबा साहब की प्रतिमा के समक्ष संघ के स्वयंसेवकों ने घोष का मधुर वादन किया।

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अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रेस ब्रीफिंग : 13 मार्च, 2026, प्रातः 09:20 बजे से लाइव

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रेस ब्रीफिंग : 13 मार्च, 2026, प्रातः 09:20 बजे से लाइव

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फर्रुखाबाद विस्फोट में घायलों के परिजनों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने दिया हर संभव मदद का आश्वासन

फर्रुखाबाद। हाल ही में नगर की एक लाइब्रेरी में हुए विस्फोट ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया था। इस भीषण हादसे में कई बच्चे घायल हो गए थे। घटना की जानकारी मिलते ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ फर्रुखाबाद नगर के स्वयंसेवक त्वरित रूप से अस्पताल पहुँचे और घायलों का हालचाल लिया।

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आरएसएस और स्वतंत्रता संग्राम

बौद्धिकों का एक प्रभावशाली समूह, जो मानता है कि भारत का अस्तित्व 15 अगस्त को हुआ था, हमेशा स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भूमिका पर सवाल उठाता है। वे इतिहास को छिपाने और यह तस्वीर पेश करने में अधिक रुचि रखते हैं कि आरएसएस कभी भी स्वतंत्रता संग्राम में शामिल नहीं था। बौद्धिक यह तर्क देने के आदी हो चुके हैं कि स्वतंत्रता महात्मा गांधी और कांग्रेस द्वारा किए गए प्रयासों का परिणाम थी।

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‘विश्व मूलनिवासी दिवस’ : भारत में प्रासंगिकता या विभाजन का षड्यंत्र?

हर साल 9 अगस्त को ‘विश्व मूलनिवासी दिवस’ दुनियाभर में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य उन मूलनिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना है, जिन पर उपनिवेशवाद या साम्राज्यवाद के दौरान अमानवीय अत्याचार हुए। परंतु प्रश्न यह है कि क्या यह दिवस भारत के लिए प्रासंगिक है? या इसे भारत के सामाजिक ताने-बाने में फूट डालने के षड्यंत्र के रूप में कुछ शक्तियाँ भुना रही हैं?

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पूर्व प्रयत्न और संघ स्थापना

कोलकाता में त्रैलोक्यनाथ चक्रवर्ती प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे, बाद में वे दिल्ली आए। जब 1989 में हम लोगों ने डॉ. हेडगेवार जी की जन्मशताब्दी मनाई तो उस समय उनको शताब्दी समिति में लेने के लिए हमारे कार्यकर्ता उनके पास गए थे, उन्होंने सहमति दे दी। तब उन्होंने कहा – 1911 में एक बार डॉ. हेडगेवार मेरे घर आए थे। उस समय डॉ. हेडगेवार ने यह बात कही थी कि दादा लगता है, इस समाज को कुछ ट्रेनिंग देने की आवश्यकता है और यह ट्रेनिंग देने की फुर्सत किसी को नहीं है, सबने अपना-अपना काम चुन लिया है। मुझे लगता है कि यह काम मुझे ही करना पड़ेगा।

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भा.म.सं.@70 – श्रमिक आंदोलन को भारत की आत्मा से जोड़ने वाली यात्रा

विरजेश उपाध्याय

23 जुलाई, 2025 को भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस, भा.म.सं.) अपनी स्थापना के 70 वर्ष पूरे कर रहा है। आज यह केवल भारत का ही सबसे बड़ा श्रमिक संगठन नहीं है, बल्कि एक ऐसा आंदोलन है, जिसने देश के श्रमिक आंदोलन की आत्मा को दिशा, उद्देश्य और भारतीय मूल्य दिए।

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आपातकाल – (25 जून, 1975 – 21 मार्च, 1977)

आपातकाल के कुछ तथ्य 

  • कांग्रेस ने 20 जून, 1975 के दिन एक विशाल रैली का आयोजन किया तथा इस रैली में देवकांत बरुआ ने कहा था, “इंदिरा तेरी सुबह की जय, तेरी शाम की जय, तेरे काम की जय, तेरे नाम की जय” और इसी जनसभा में अपने भाषण के दौरान इंदिरा गांधी ने घोषणा की कि वे प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र नहीं देंगी।

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योग दिवस – 21 जून

योग का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है। इसका उल्लेख रामायण और महाभारत के कालखंड से लेकर भगवान शिवजी, भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों में मिलता है। ऋग्वेद में ऋषियों द्वारा ध्यान, तप और आत्मा की खोज का उल्लेख मिलता है, जो योग की प्रारंभिक चेतना को दर्शाता है। उपनिषदों में यह चेतना और विकसित होकर ‘प्रणव साधना’, ‘ध्यान योग’ और ‘ब्रह्मविद्या’ के रूप में दर्शन की परिपक्व अवस्था में पहुँचती है।

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