चित्रकूट विराट हिंदू सम्मेलन: मत्स्य अवतार से विज्ञान तक, अखिलेश जी ने बताया ‘सनातन’ का वैश्विक महत्व

मानिकपुर (चित्रकूट)। जनपद के चित्रकूटधाम खंड के अंतर्गत मानिकपुर के भौंरी मंडल में भव्य ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे अखिलेश जी (क्षेत्र शारीरिक शिक्षण प्रमुख) ने हिंदू पहचान, सनातन परंपरा और वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ समाज को संगठित होने का आह्वान किया।

अखिलेश जी, डॉ. सुधा सिंह और डॉ. रामनारायण त्रिपाठी विराट हिंदू सम्मेलन के मंच पर

सनातन परंपरा और विज्ञान का अद्भुत संगम

मुख्य वक्ता अखिलेश जी ने अपने संबोधन में पृथ्वी की आयु और सनातन पंचांग के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि “पृथ्वी की आयु 9 अरब वर्ष होने के वैज्ञानिक और पंचांगीय प्रमाण मौजूद हैं।” उन्होंने रदरफोर्ड के सिद्धांत की तुलना भगवान विष्णु की शक्ति और दशावतारों से करते हुए बताया कि हमारे पूर्वज विज्ञान और आध्यात्म के कितने गहरे ज्ञाता थे।

मत्स्य अवतार से सृष्टि के प्रारंभ तक की कथा

संबोधन के दौरान उन्होंने राजा सत्यव्रत और मत्स्य अवतार की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे भगवान विष्णु ने प्रलय के समय सप्तर्षियों और आवश्यक वस्तुओं को नौका पर रखने का निर्देश देकर सृष्टि की रक्षा की। उन्होंने विष्णु के तीन स्वरूपों और ब्रह्मा द्वारा ब्रह्मांड के संचालन के रहस्य को भी साझा किया।

चित्रकूट का गौरव और श्रीराम का वनवास

सम्मेलन में चित्रकूट की महिमा का बखान करते हुए कहा गया कि इस पावन धरा पर जन्म लेना सौभाग्य की बात है। मंदाकिनी नदी का तट और महर्षियों के आदेश पर प्रभु श्रीराम का यहाँ निवास करना, इस भूमि को वैश्विक श्रद्धा का केंद्र बनाता है। श्रीराम के वनवास काल के चरित्र को याद करते हुए आज की पीढ़ी को हिंदू होने के वास्तविक अर्थ और गर्व से परिचित कराया गया।

शताब्दी वर्ष और सामाजिक संकल्प

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे:

  • कुटुंब प्रबोधन: संयुक्त परिवार की महत्ता और शहरी जीवन में पारिवारिक भाव को जगाने पर जोर।

  • नागरिक कर्तव्य: केवल संवैधानिक अधिकार ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और आपसी सहयोग को नागरिक धर्म बताया।

  • समरसता: प्रभु श्रीराम के दंडकारण्य जीवन से सीख लेकर समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने का संकल्प।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख व्यक्तित्व

सम्मेलन में प्रमुख रूप से डॉ. सुधा सिंह जी (विभाग कार्यवाहिका), डॉ. रामनारायण त्रिपाठी जी (महंत, गायत्री शक्तिपीठ), डॉ. वरुण प्रपन्नाचार्य जी, लोकेन्द्र जी (जिला प्रचारक, चित्रकूटधाम) , सिद्धार्थ राय जी, ओम प्रकाश जी, अखिलेश जी, शिवाकांत जी और रुद्र जी आदि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन सनातन धर्म के उद्घोष और भारत माता की जय के गगनभेदी जयकारों के साथ हुआ। वक्ता ने नई पीढ़ी को ‘हिंदुत्व की नींव का पत्थर’ बनने और पुरानी पीढ़ी से ज्ञान का हस्तांतरण करने की अपील की।

“चित्रकूट विराट हिंदू सम्मेलन: मत्स्य अवतार से विज्ञान तक, अखिलेश जी ने बताया ‘सनातन’ का वैश्विक महत्व” पर एक विचार

  1. हिंदू सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित, जाग्रत और एकसूत्र में पिरोकर सामाजिक समरसता, एकता व सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देना है। ये सम्मेलन जातीय भेदभाव मिटाकर, जाति-पांत से ऊपर उठकर, राष्ट्र निर्माण और सनातन संस्कृति की रक्षा हेतु सामूहिक प्रयास का मंच हैं, जो सामाजिक समभाव और कर्तव्यबोध की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
    कल का कार्यक्रम बहुत ही भव्य और दिव्य हुआ।।

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