भारत को जानने और बनाने की जिम्मेदारी तरुणों की: माननीय मनमोहन वैद्य

कानपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत बीएनएसडी शिक्षा निकेतन, कानपुर में ‘तरुणी बैठक’ का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य माननीय मनमोहन वैद्य जी उपस्थित रहे। बैठक में उन्होंने उपस्थित तरुणों और छात्राओं के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उनकी जिज्ञासाओं का समाधान कर उन्हें राष्ट्र निर्माण का मंत्र दिया।

RSS शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कानपुर में छात्राओं की संगोष्ठी।

आजादी के बलिदान को सार्थक बनाना हमारी जिम्मेदारी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय मनमोहन वैद्य जी ने कहा, “हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म आजाद भारत में हुआ। लेकिन यह आजादी हमें सहज नहीं मिली है। भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, चन्द्रशेखर आजाद, सरदार पटेल, और डॉ. भीमराव अंबेडकर रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती जैसे अनगिनत क्रांतिकारियों और महापुरुषों की पीढ़ियों ने अपने जीवन का बलिदान दिया, तब जाकर हमें यह स्वतंत्र राष्ट्र मिला है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि आज हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी भारत को ‘भारत’ बनाए रखना है।

शिक्षा केवल जीविकोपार्जन नहीं, बल्कि जीवन की दिशा है

शिक्षा पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल पैसा कमाना नहीं होना चाहिए। ‘एजुकेशन’ (Education) के साथ-साथ ‘लर्निंग’ (Learning) अनिवार्य है, जो जीवन को सही दिशा देती है। स्वामी विवेकानन्द की शिष्या भगिनी निवेदिता का उदाहरण देते हुए उन्होंने समाज को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा व उनके नेतृत्व पर विशेष बल दिया।

समय नहीं, ‘कार्य’ का करें प्रबंधन (Task Management)

विद्यार्थियों को सफलता का सूत्र देते हुए वैद्य जी ने कहा कि समय सबके लिए समान है, इसलिए समय का नहीं बल्कि ‘टास्क मैनेजमेंट’ (Task Management) करना सीखें। उन्होंने कार्यों को चार श्रेणियों (Urgent, Important & Urgent, Not Important) में विभाजित कर प्राथमिकता तय करने का मार्गदर्शन दिया। उन्होंने युवाओं को संकल्प दिलाया कि सूर्योदय से पूर्व उठकर योग व प्राणायाम को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

भारत को जानो, भारत को मानो, भारत के बनो

बैठक के समापन पर उन्होंने एक प्रेरक आह्वान किया:
“भारत को जानो, भारत को मानो, भारत के बनो और भारत को बनाओ।”
उन्होंने बताया कि भारत को जानने के तीन ही मार्ग हैं—पढ़कर, देखकर और अनुभवी लोगों को सुनकर। उन्होंने कहा कि सिंधु नदी से लेकर सागर तक रहने वाला संपूर्ण समाज सांस्कृतिक रूप से हिंदू है और आध्यात्मिकता हमारे पूर्वजों की अमूल्य देन है।

बैठक में तरुणों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए कुछ महत्वपूर्ण आह्वान भी किए :

• प्रत्येक रविवार प्रातः 6:30 से 7:30 बजे तक आत्मरक्षा (Self-Defence) का प्रशिक्षण।
• माह में एक रविवार सेवा कार्यों के लिए समर्पित करना।
• प्रतिदिन रात्रि 8:00 बजे अपने जीवन के ध्येय का स्मरण करना।
इस कार्यक्रम में शहर की तरूणी विद्यार्थी उपस्थित रहीं तथा प्रान्त संघ चालक भवानी भीख, प्रान्त प्रचारक श्रीराम, डाक्टर अनुपम, डाक्टर श्याम बाबू गुप्त, बैरिस्टर आदि उपस्थित रहे।

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