वो जात-पात से तोड़ेंगे, हम समता-ममता से जोड़ेंगे: श्रीराम जी

कानपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रान्त प्रचारक श्रीराम जी ने समाज को एकजुट करने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसे ‘माँ’ का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने जोर दिया कि हिन्दू समाज की शक्ति उसकी एकता में निहित है और जब-जब यह शक्ति कम हुई है, देश को नुकसान उठाना पड़ा है। आनन्दपुरी पार्क में आयोजित विशाल हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्रीराम जी ने सामाजिक समरसता और वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से अपने विचार रखे।

ऐतिहासिक उदाहरणों से एकता का पाठ

अपने संबोधन में प्रान्त प्रचारक ने रामायण और महाभारत का संदर्भ देते हुए कहा कि शक्ति हमेशा समाज में होती है। उन्होंने कहा:

  • मर्यादा पुरुषोत्तम राम: उन्होंने समाज के शोषित, वंचित और उपेक्षित वर्ग को गले लगाकर एक सामाजिक शक्ति खड़ी की और रावण जैसे आतातायी का अंत किया।

  • श्रीकृष्ण: उन्होंने अधर्म के विरुद्ध सत्य और धर्म की स्थापना की।

  • महान विभूतियाँ: मुगलों के विरुद्ध शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप का संघर्ष हो या अंग्रेजों के खिलाफ क्रांतिकारियों का बलिदान, हर कालखंड में महापुरुषों ने समाज को संगठित कर राष्ट्र की रक्षा की है।

वर्तमान चुनौतियां और ‘हम दो हमारे तीन’

श्रीराम जी ने समाज के सामने खड़ी वर्तमान चुनौतियों—लव जिहाद, लैंड जिहाद और धर्मांतरण—के प्रति आगाह किया। जनसंख्या असंतुलन पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि “जब-जब हिन्दू घटा है, तब-तब देश बंटा है।” उन्होंने सुझाव दिया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए समाज को ‘हम दो हमारे तीन’ की अवधारणा पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि विरोधी शक्तियां हमें जाति के नाम पर तोड़ेंगी, लेकिन हमें ‘समता और ममता’ के भाव से समाज को जोड़ना है।

महापुरुषों का बलिदान और पारिवारिक मूल्य

सम्मेलन में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी समाज के मार्गदर्शन हेतु महत्वपूर्ण बातें कहीं:

  • छत्रपति संभाजी महाराज का स्मरण: परमट महंत इच्छा गिरि महाराज ने छत्रपति संभाजी महाराज के 40 दिनों के भीषण कष्ट और उनके बलिदान की गाथा सुनाई। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को प्रतिदिन यह गौरवशाली इतिहास सुनाएं।

  • पंच परिवर्तन: बिन्दू सिंह ने ‘पंच परिवर्तन’ (स्वदेशी, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण, सामाजिक समरसता और नागरिक अनुशासन) पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता ही सबसे बड़े शुभचिंतक हैं, उनके साथ सुख-दुख साझा करना चाहिए।

विशिष्ट जनों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम की अध्यक्षता शीलचन्द्र जैन जी ने की। इस अवसर पर बाबा आनंदेश्वर मंदिर के महंत हितेश्वर गिरि जी महाराज, त्रिलोकी नाथ जिंदल जी और ओम प्रकाश बक्सरिया जी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से विधायक महेश त्रिवेदी जी, समाजसेवी पूनम तिवारी जी, माया देवी वर्मा जी, संजीव जैन जी, अंजू रतन मेहरोत्रा जी, जिला प्रचारक यश जी, सत्यम जी, योगेंद्र जी और कृष्ण प्रसाद  जी सहित बड़ी संख्या गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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