एकता और समरसता के संकल्प के साथ जोल्हूपुर में ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ संपन्न
जोल्हूपुर, कालपी (उरई)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत, कदौरा खण्ड के उसरगांव मण्डल स्थित ग्राम जोल्हूपुर में ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने हिंदू समाज की एकजुटता, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण में नागरिक कर्तव्यों पर विशेष बल दिया।
भारत की अवधारणा और वैश्विक कल्याण
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता प्रान्त संघचालक (मा०) भवानी भीख जी द्वारा भारतमाता के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया गया। जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “संघ की 100 वर्षों की यात्रा वास्तव में भारत को स्व-त्व से परिचित कराने की यात्रा है। विश्व में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसे ‘माता’ का दर्जा प्राप्त है। हमारी संस्कृति ‘विश्व का कल्याण हो’ के मंत्र पर आधारित है, जहाँ हम केवल अपने लिए नहीं बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रार्थना करते हैं।”
“जब-जब हिन्दू घटा है, तब-तब हिन्दू कटा है”
भवानी भीख जी ने इतिहास और वर्तमान की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अतीत में कुछ रूढ़िवादी कारणों से समाज खंडित हुआ था, लेकिन स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा ने हमें पुनः संगठित किया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “आज हम पराजय का नहीं, बल्कि विजय का उत्सव मना रहे हैं। हिंदू समाज की एकता का ही परिणाम है कि अयोध्या में प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर निर्मित हुआ है। हमें याद रखना होगा कि जब-जब हिन्दू घटा है, तब-तब हिन्दू कटा है।” उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि जो लोग कभी रामसेतु को नकारते थे, उन्हें आज हिंदू एकता के कारण जनभावनाओं का सम्मान करना पड़ रहा है।
सामाजिक परिवर्तन के पांच सूत्र (पंच परिवर्तन)
सह वक्ता डॉ. ब्रह्मानंद जी ने समाज के समक्ष पांच प्रमुख लक्ष्य रखे, जिन्हें ‘पंच परिवर्तन’ के रूप में जाना जाता है:
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सामाजिक समरसता: जाति, पंथ और भाषा के आधार पर भेदभाव को जड़ से मिटाना।
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कुटुंब प्रबोधन: आधुनिकता की दौड़ में बिखरते परिवारों को बचाना और संस्कारों को जीवित रखना।
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पर्यावरण संरक्षण: जल बचाना, प्लास्टिक का त्याग करना और व्यापक वृक्षारोपण करना।
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स्वदेशी: आत्मनिर्भर भारत के लिए स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देना।
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नागरिक कर्तव्य: समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना और अधिकारों से पहले कर्तव्यों का पालन करना।
एकता का संकल्प और आशीर्वाद
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूज्य महंत जी ने उपस्थित जनसमूह को एकता के सूत्र में बंधे रहने का संदेश दिया और अपने आशीर्वचन से सभी को अभिसिंचित किया। सम्मेलन में “जाति-पाति की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई” के नारे के साथ सामाजिक एकता का संकल्प लिया गया।
प्रमुख उपस्थित गणमान्य
इस अवसर पर वीरेंद्र पाण्डेय (जिला संघचालक), भुवनेश जी (विभाग धर्म जागरण प्रमुख), प्रदीप मेहरोत्रा (नगर कार्यवाह कालपी), संजीव उपाध्याय (क्षेत्रीय मंत्री), विशाल सिंह सेंगर, सुधाकर चतुर्वेदी (खण्ड कार्यवाह), ध्रुव जी (खण्ड प्रचारक), पुष्पेंद्र द्विवेदी (संयोजक), रामरूप (सह संयोजक), भूपेंद्र सिंह (ग्राम प्रधान), विजय सिंह, आर.एस. चंदेल, रवि कुशवाहा, आनंद पाण्डेय, शिवाकांत द्विवेदी, सुबोध द्विवेदी (नगर अध्यक्ष), और मानसिंह यादव सहित सैकड़ों की संख्या में स्वयंसेवक और ग्रामीण उपस्थित रहे।

