सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता का शंखनाद: भिटारा में संपन्न हुआ ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’

जालौन (उरई): “जब-जब हिन्दू घटा है, तब-तब हिन्दू कटा है।” यह आह्वान जालौन के भिटारा गाँव में गूँजा, जहाँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया। यह सम्मेलन केवल एक आयोजन मात्र नहीं, बल्कि सुप्त पड़ी सांस्कृतिक चेतना को पुनः जागृत करने और समाज को एकता के सूत्र में पिरोने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। इस ऐतिहासिक कालखंड के उपलक्ष्य में संघ ने संकल्प लिया है कि वह देश के प्रत्येक गाँव और बस्ती तक पहुँचकर समाज के साथ मिलकर हिन्दू शक्ति का प्रकटीकरण करेगा। भिटारा में आयोजित यह सम्मेलन इसी राष्ट्रव्यापी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

प्रान्त प्रचारक श्री रामजी भाईसाहब विराट हिन्दू सम्मेलन में संबोधन देते हुए

महापुरुषों की विरासत और भारत माँ का यशगान

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कानपुर प्रान्त के प्रान्त प्रचारक श्री श्रीरामजी ने अपने संबोधन में भारत की अद्वितीय पहचान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विश्व में भारत ही एकमात्र राष्ट्र है जिसे ‘माँ’ मानकर पूजा जाता है। सदियों से हमारे ऋषियों, संतों और महापुरुषों ने हमें एकता का पाठ पढ़ाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी पूजा और अनुष्ठानों का अंत हमेशा “विश्व का कल्याण हो” के घोष के साथ होता है, जो हमारे धर्म की उदारता और वैश्विक दृष्टि को दर्शाता है।

विराट हिन्दू सम्मेलन भिटारा जालौन में मंच पर उपस्थित अतिथि

संघर्ष से विजय की ओर बढ़ता समाज

इतिहास के पन्नों को पलटते हुए श्री रामजी ने कहा कि शक, हूण, मुगल और अंग्रेजों जैसे अनेक आक्रांताओं ने हमारी संस्कृति को मूल से नष्ट करने के कुत्सित प्रयास किए। किंतु, भारतीय समाज की संगठित शक्ति ही थी कि हम छिन्न-भिन्न नहीं हुए।

  • विरासत की पुनर्स्थापना: आज का समय पराजय का नहीं, बल्कि विजय के उत्सव का है। अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण और रामसेतु की रक्षा इसी एकजुटता के ज्वलंत उदाहरण हैं।

  • वैश्विक पटल पर भारत: आज विदेशों में जो भारत का मान-सम्मान बढ़ रहा है, वह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि संगठित हिन्दू समाज की शक्ति का परिणाम है।

सामाजिक सुधार हेतु ‘पंच परिवर्तन’ का आह्वान

सम्मेलन में केवल धर्म ही नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों और भविष्य की चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। सुनीता जी ने ‘पंच परिवर्तन’ का संदेश देते हुए समाज के सामने पाँच संकल्प रखे:

  1. समरसता: जातिवाद का त्याग कर समाज में समानता का भाव लाना।

  2. पर्यावरण: प्रकृति की देखभाल और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाना।

  3. कुटुम्ब प्रबोधन: पारिवारिक संबंधों को मजबूत करना और संस्कारों का पोषण।

  4. स्वदेशी: आत्मनिर्भर भारतीय जीवनशैली को बढ़ावा देना।

  5. नागरिक कर्तव्य: देश के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को निष्ठापूर्वक निभाना।

जाति-पाति की करो विदाई, हम सब हिन्दू भाई-भाई

सम्मेलन का सबसे प्रभावी संदेश सामाजिक एकता पर रहा। प्रान्त प्रचारक जी ने जोर देकर कहा कि हमें किसी के बहकावे में नहीं आना है। समाज को खंडित करने वाली ताकतों को जवाब देने का एक ही तरीका है—हम सब एक रहें। “जाति-पाति की करो विदाई, हम सब हिन्दू भाई-भाई” के नारे के साथ पूरे वातावरण में समरसता का संकल्प दोहराया गया।

दिव्य सान्निध्य और गरिमामयी उपस्थिति

यह कार्यक्रम संत शिरोमणि श्री श्री 108 दूधाधारी जी महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ, जिनके आशीर्वचन ने उपस्थित जनसमूह को आत्मिक ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम में जिले और खंड स्तर के प्रमुख पदाधिकारियों सहित भारी संख्या में मातृशक्ति और स्वयंसेवकों ने सहभागिता की।

जालौन हिन्दू सम्मेलन में उपस्थित विशाल जनसमूह और मातृशक्ति

जालौन हिन्दू सम्मेलन में उपस्थित विशाल जनसमूह और मातृशक्ति

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