संघ और डॉक्टर साहब समानार्थक शब्द हैं – डॉ. मोहन भागवत जी

‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष – शतक’ के गीतों का लोकार्पण

नई दिल्ली, 11 जनवरी 2026।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने केशव कुंज, झंडेवालान में आयोजित कार्यक्रम में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष – शतक’ फिल्म के दो गीतों ‘भारत मां के बच्चे, तथा ‘भगवा है मेरी पहचान’ का लोकार्पण किया। गीतों को गायक सुखविंदर सिंह ने आवाज दी है।

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समाज परिवर्तन के लिए सभी धार्मिक, सामाजिक संगठनों व सज्जन शक्ति को एकजुट होकर प्रयास करना होगा – दत्तात्रेय होसबाले जी

रोहतक। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त रोहतक के गोहाना रोड स्थित शिक्षा भारती वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में “सज्जन शक्ति की समाज परिवर्तन में भूमिका” विषय पर सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि भारत विश्व का मार्गदर्शन कर सके इसके लिए देश को आंतरिक तौर पर मजबूत करना होगा, आंतरिक ताकत देनी होगी और संघ पिछले 100 वर्षों से इसके लिए ही कार्यरत है। देश को आंतरिक तौर पर मजबूत करने के लिए समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट होकर आगे आना होगा। सद्भाव के साथ सभी महापुरुषों की जयंती मिलकर मनानी होगी, तभी राष्ट्र मजबूत होगा और जात-पात की खाई को पाटा जा सकेगा।

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धर्म का अर्थ पूजा-पद्धति नहीं; धर्म सबको साथ लेकर चलता है, सबका उत्थान करता है – डॉ. मोहन भागवत जी

हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती है; हिन्दू धार्मिक पहचान से बढ़कर, स्वभाव और प्रकृति है

भोपाल। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त भोपाल में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमारे मत-पंथ, सम्प्रदाय, भाषा, जाति अलग हो सकती है। लेकिन हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती है। हम सबकी एक संस्कृति और धर्म है। हम सबके पूर्वज समान हैं।

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जहां नारी का सम्मान और स्थान सुरक्षित होता है, वहां समाज स्वतः ही स्वस्थ रहता है – डॉ. मोहन भागवत जी

हमारा धर्म व संस्कृति मातृशक्ति के कारण ही सुरक्षित है, भोपाल में ‘मातृशक्ति संवाद’ में बोले सरसंघचालक जी

भोपाल। ‘मातृशक्ति संवाद’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जब हम सभ्य समाज की बात करते हैं तो उसमें महिलाओं की भूमिका स्वतः ही केंद्रीय हो जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारा धर्म, हमारी संस्कृति और हमारी सामाजिक व्यवस्था महिलाओं के कारण ही सुरक्षित है। अब वह समय चला गया, जब महिलाओं को केवल सुरक्षा की दृष्टि से घर तक सीमित रखा जाता था। आज परिवार और समाज दोनों को स्त्री और पुरुष मिलकर आगे बढ़ाते हैं, इसलिए दोनों का प्रबोधन आवश्यक है।

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सामाजिक सद्भाव नई अवधारणा नहीं, भारतीय समाज का स्वभाव रहा है – डॉ. मोहन भागवत जी

राष्ट्र निर्माण के लिए सभी एकजुट होकर कार्य करें – पंडित प्रदीप मिश्रा जी

भोपाल, 03 जनवरी 2026।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक सद्भाव कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज का स्वभाव रहा है। समाज में सज्जन शक्ति का जागरण, आचरण में पंच परिवर्तन और निरंतर सद्भावना संवाद आज की अनिवार्य आवश्यकता है। यह बैठक दो सत्रों में आयोजित की गई। प्रथम सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ हुआ। मंच पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी, प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी तथा मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडेय जी उपस्थित रहे। मध्यभारत प्रान्त के 16 शासकीय जिलों के समाज के विभिन्न वर्गों और संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता बैठक में रही।

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अपने धर्म-संस्कृति का संरक्षण कर, भारत को परम वैभव पर ले जाने का लक्ष्य लेकर कार्य कर रहा – डॉ. मोहन भागवत जी

भोपाल, 02 जनवरी 2026।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के प्रसंग पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का देशभर में प्रवास हो रहा है। इसी श्रृंखला में दो दिवसीय प्रवास के पहले दिन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि संघ अपने जन्म से ही लक्ष्य लेकर चल रहा है कि अपने धर्म-संस्कृति का संरक्षण कर, अपने भारत को परम वैभव पर लेकर जाना है। संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक यह प्रतिज्ञा करता है। कोई भी देश सम्पूर्ण समाज के योगदान से ही बड़ा होता है। नेता, नीति और व्यवस्था, ये सब तब सहायक होते हैं जब समाज गुण सम्पन्न होता है। भारत का युवा जाग गया है, वह अपने देश को समर्थ बनाना चाहता है। संघ युवाओं से आह्वान करता है कि वे संघ की शाखा में आएं या फिर संघ की योजना से चल रहे अपने रुचि के कार्य में जुड़कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।

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वंचित को सशक्त करना हो समाज का उद्देश्य – डॉ. मोहन भागवत जी

सामाजिक सद्भाव से अनेक चुनौतियों का समाधान संभव; संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त सद्भाव बैठक का आयोजन

रायपुर, 01 जनवरी 2026। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आज स्थानीय श्री राम मंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में विभिन्न जाति, समाज, पंथ के पाँच सौ से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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“पंच परिवर्तन से राष्ट्र उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा” – डॉ. मोहन भागवत जी

हिन्दू धर्म सभी पंथों का मूल है, बँटने का नहीं संगठित होने का समय – श्री असंग देव जी

रायपुर, 31 दिसम्बर 2025। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त छत्तीसगढ़ के रायपुर अंतर्गत अभनपुर के सोनपैरी स्थित असंग देव कबीर आश्रम में विशाल हिन्दू सम्मेलन आयोजित किया गया।

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आरोग्य सेवा सभी के लिए सस्ती और सुलभ होनी चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

पंडित दीनदयाल उपाध्याय चंद्रपुर कैंसर अस्पताल का लोकार्पण

चंद्रपुर, 22 दिसंबर।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय चंद्रपुर कैंसर अस्पताल के लोकार्पण समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि कैंसर या कोई भी बीमारी ज़िंदगी में मुश्किलें खड़ी करती है। हर कोई इस मुश्किल से बाहर निकलना चाहता है। यह किसी एक जगह की समस्या नहीं है। पूरी दुनिया में ऐसी ही तस्वीर दिखती है। शिक्षा और स्वास्थ्य इंसान की दो ज़रूरतें हैं, और ये सभी को, हर जगह मिलनी चाहिए। ये सुविधाएँ लोगों के लिए सस्ती और सुलभ होनी चाहिए।

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संघ का एक ही लक्ष्य है, तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें – डॉ. मोहन भागवत जी

कोलकाता व्याख्यानमाला  – 100 वर्ष की संघ यात्रा नए क्षितिज

दिनांक – 21 दिसंबर 2025, तृतीय सत्र

संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त कोलकाता में आयोजित एक दिवसीय व्याख्यानमाला के तृतीय सत्र (प्रश्नोत्तर सत्र) में विभिन्न विषयों पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी द्वारा प्रदत्त उत्तरों से प्रमुख बिंदु –

  • मित्र भाव और अपने आचरण के माध्यम से ही हम किसी दूसरे व्यक्ति के विचार में परिवर्तन कर सकते हैं। युवा सहित सर्वत्र समाज में परिर्वतन के लिए रा.स्व.संघ के स्वयंसेवक इसी पद्धति के आधार पर चलते हैं।
  • संघ केवल शाखा चलाता है और कुछ नहीं करता। संघ के स्वयंसेवक सब कुछ करते हैं।
  • हिन्दुत्व एक मूल्य व्यवस्था है और सेकुलरिज़्म एक राज्य व्यवस्था है। भारत के संदर्भ में सेकुलरिज़्म एक अप्रासंगिक (इरेलेवेंट) शब्द है।
  • धर्म और रिलीजन पर्यायवाची शब्द नहीं हैं।
  • कोई मंदिर नहीं जाता तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह अधार्मिक है। कर्म कांड और पूजा पाठ ही धर्म नहीं है। पर कर्म कांड और पूजा पाठ अकारण भी नहीं है।
  • सेकुलरिज़्म यानी पंथनिरपेक्ष होना है, धर्मनिरपेक्ष होना नहीं।
  • धर्म के चार पैर हैं : सत्य, करुणा, शुचिता और तपस। भारत इन पर सतत चलता रहा है, इसलिए उन्नत हो रहा है।
  • स्वच्छता का विषय स्वयं से शुरू करना होगा। अपने घर और अपने घर के सामने के रास्ते को साफ रखना, इतना भी किया तो परिवर्तन दिखने लगेगा। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फेंकना, यह स्वयं से शुरू करना चाहिए और अपने मित्रों से उसका आग्रह करना। इससे स्वच्छता का वातावरण बनेगा।
  • संस्कृत के प्रचार-प्रसार हेतु संस्कृत भारती नामक संगठन कार्य कर रहा है। संस्कृत संभाषण की कार्यशाला भी वे चलाते हैं, जिसमें संस्कृत बोलने का अभ्यास कराया जाता है। संस्कृत बोलने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। कर्नाटक का मुत्तूर गांव पूरी तरह संस्कृत में बोलने वाला गांव बना है। संस्कृत के प्रति आग्रह बना रहना चाहिए।
  • ज्ञान सब प्रकार का होना चाहिए, लेकिन इसके साथ विवेक भी चाहिए।
  • परम्परागत मूल्यों का संवर्धन दकियानूसी नहीं है।
  • अपना युवा कर्तृत्व सम्पन्न है। हमारे युवाओं को राष्ट्रभक्ति और संस्कृति-भक्ति मिल गई तो वे आधुनिक तकनीक के साथ सम्पूर्ण दुनिया का कल्याण करेंगे।
  • प्राइमरी और सेकेंडरी चिकित्सा गाँव और ज़िला स्तर पर उपलब्ध हो।
  • रूस, यूक्रेन और इज़रायल में जो हो रहा है, उससे एक बात तो स्पष्ट है—जिसकी लाठी उसकी भैंस। ये दुनिया को शांति समझाते फिरते हैं और अब ये युद्ध कर रहे हैं।
  • सब प्रकार की संप्रभुता प्राप्त करनी चाहिए। हमें (भारत को) सुरक्षा परिषद में सीट दो – यह कहने की आवश्यकता नहीं है; उन्हें यह कहना चाहिए कि भारत को सीट देनी चाहिए।
  • हमारे पड़ोसी देश एक तरह से हमारे ही हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि व्यक्ति से व्यक्ति का संबंध बने। इसके लिए सरकार को सुविधाएँ भी प्रदान करनी चाहिए। इन्हें जोड़ना ही है—ऐसी दृष्टि चाहिए। अभी की विदेश नीति में सुधार की नहीं, सजगता और गति की आवश्यकता है।
  • बांग्लादेश में हिन्दुओं की दुर्दशा कब समाप्त होगी? बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों को एकत्रित रहना पड़ेगा। दुनियाभर के हिन्दुओं को अपनी मर्यादा में रहकर उनकी सहायता करनी होगी। हम भी कर रहे हैं।
  • मदरसों में राष्ट्रीय और आधुनिक शिक्षा भी मिलनी चाहिए।
  • संघ का काम कोई भी आकर देख सकता है। वहाँ आपको दिखे कि संघ मुस्लिम-विरोधी है, तो ठीक; और अगर ऐसा नहीं है, तो अपनी धारणा बदलिए। मैं तो यही कहूँगा कि अब यह समझाने की बात नहीं है, आकर देखिए। कई लोग देखने के लिए आए हैं और देखकर उन्होंने मान लिया है कि संघ मुस्लिम-विरोधी नहीं है।
  • जहां तक अयोध्या में राम मंदिर का प्रश्न है, न्यायालय के निर्णय के बाद वहां मंदिर का निर्माण हुआ। अब बाबरी मस्जिद के नाम पर कोई निर्माण करना झगड़ा बनाए रखने का एक राजनीतिक षड्यंत्र है।
  • मुसलमानों को समझना होगा और कहना होगा कि वे पंथ/मजहब या पूजा-पद्धति के आधार पर भिन्न हैं, पर पूर्वज और संस्कृति के आधार पर बड़े विचार के ही अंग हैं।
  • जिन जातियों ने अब तक अपना धर्म नहीं बदला और अब बदल रहे हैं तो इसके लिए दोषी हमारा समाज ही है। हमें उनके बीच जाकर काम करना चाहिए, उनकी उपेक्षा न करें। उनके सुख-दुःख में शामिल हों। जब हम उनके साथ समरस होंगे तो जो धर्म परिवर्तन कर रहे हैं वे नहीं करेंगे और जो कर चुके हैं वे वापस आ आएंगे।
  • संविधान की प्रस्तावना संक्षेप में हिन्दुत्व को ही बताती है। इसमें सीधे तौर पर ‘हिन्दू’ शब्द नहीं है, लेकिन सभी उपासनाओं को स्वतंत्रता, न्याय और स्वातंत्र्य है। डॉ. आंबेडकर साहब ने कहा कि यह सब मैंने विदेश से नहीं लिया, यह तथागत बुद्ध से लिया है। बंधुभाव ही धर्म है, यह उन्होंने अपने भाषण में कहा। धर्म पर आधारित संविधान, यह हिन्दू राष्ट्र की विशेषता है। यद्यपि ‘हिन्दू’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया, लेकिन संविधान सभा में स्वभाव से सभी लोग वही थे। अब सूरज पूरब में उगता है, इसके लिए भी संविधान की मंजूरी चाहिए? हिन्दुस्थान हिन्दू राष्ट्र है। ये सत्य है।
  • पहले भी हमारे यहां जातियां थीं, पर भेदभाव नहीं था। देश काल परिस्थिति के कारण यह जातिभेद आया, उसका जाने का समय आ गया है। हमारी एक राष्ट्रीय पहचान पहले से है, वह हिन्दू है, वही भारतीय हैं।
  • संघ मनुस्मृति लेकर नहीं चलता। हमारा अपना एक संविधान है। हम महिला-विरोधी नहीं हैं। हम पूरे समाज का संगठन करते हैं। हमने अपनी पद्धति से महिलाओं को कई कार्यों में जोड़ा है। उनके लिए व्यक्ति निर्माण का कार्य राष्ट्र सेविका समिति करती है।
  • हिन्दू समाज की सबसे बड़ी कमी एक ही है कि वह जिस तरह से जुड़ा होना चाहिए, वैसा नहीं है। जबकि हिन्दू समाज के पास बुद्धि, ज्ञान, पराक्रम आदि सब कुछ है।
  • मणिपुर के प्रवास के दौरान मैंने सभी मत पंथों और गुटों के साथ युवाओं से भी बातचीत की। वहां के हालात सुधर रहे हैं। कुछ समय लगेगा लेकिन मन का भाव भी बदलेगा। इसके लिए निरंतर संवाद करते रहना होगा। समूचे पूर्वोत्तर के राज्यों में रहने वालों की जड़ें भारत से ही जुड़ी हैं।
  • चिकित्सकों और जनसंख्या के संतुलन आदि के आधार पर कहा जा सकता है कि 19 से 25 वर्ष के बीच विवाह और सही समय पर तीन बच्चे होना एक दंपत्ति के लिए स्वास्थ्यकर होता है।
  • देश के क्रांतिकारियों और महापुरूषों को सम्मान दिलाने के लिए समाज के किसी भी वर्ग से कोई भी प्रयास होगा तो संघ का उसे सहयोग और समर्थन रहेगा। ऐसे हजारों-लाखों महापुरूष हुए हैं, जिन्हें योग्य नाम और पहचान, सम्मान नहीं मिला है।
  • सब प्रकार की सुविधा और संसाधन होने के बावजूद कुछ लोग भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं। स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार अभाव के कारण नहीं, बल्कि व्यक्ति के नैतिक पतन के चलते होता है।
  • भाजपा नेतृत्व से हम सदैव दूर ही रहते आए हैं, जनसंघ के जमाने से ही ऐसा रहता है। संघ के स्वयंसेवकों से हमारा हमेशा जुड़ाव रहता है। नरेन्द्र भाई, अमित भाई हमारे संघ के स्वयंसेवक हैं और उनके साथ हमारे निकट संबंध हैं। कुछ दिनों पहले अंडमान में अमित भाई मेरे निकट बैठे थे। यह दूरियाँ और नज़दीकियाँ जैसा कुछ नहीं है।
  • सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठन करने के लिए ही संघ और उसके स्वयंसेवक निरंतर कार्य कर रहे हैं। हम इसके लिए ही कार्य करते रहेंगे। यह जब तक नहीं होगा तब तक करते रहेंगे। इसी जीवन में इस लक्ष्य को प्राप्त करें, इस विश्वास को लेकर काम करते हैं। नहीं हुआ तो अगला जन्म लेकर भी यही काम करेंगे। हमारी सोच बहुत साफ है कि हम सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठन करने निकले हैं, समाज के भीतर एक अलग समाज बनाने के लिए नहीं।
  • हम अपने गौरवशाली इतिहास को भूल चुके हैं। हमारे पूर्वजों के द्वारा स्थापित गौरव को जानें।
  • दुनिया को सतत धर्म देने का काम भारत को करना है।
  • संघ को सत्ता नहीं चाहिए और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा करनी है। संघ का एक ही लक्ष्य है – तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें।