‘जाति’ भेद को व्यवहार से हटाने के पहले लिए मन से निकालना होगा – डॉ. मोहन भागवत जी

प्रमुख जन संगोष्ठी में सरसंघचालक जी का प्रबुद्ध नागरिकों से संवाद

छत्रपति संभाजीनगर, 17 जनवरी 2026।

संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित प्रमुखजन गोष्ठी में उपस्थित प्रबुद्ध नागरिकों ने अपनी जिज्ञासाएँ लिखित रूप में प्रस्तुत कीं, जिनका समाधान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने विस्तारपूर्वक किया। इस अवसर पर मंच पर प्रांत संघचालक अनिल भालेराव जी उपस्थित रहे।

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प्रौद्योगिकी का उपयोग समाजहित में होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

छत्रपति संभाजीनगर, 17 जनवरी 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने युवा उद्यमी संवाद में कहा कि प्रौद्योगिकी आज की अपरिहार्य आवश्यकता है। स्वदेशी का उपयोग करने का अर्थ प्रौद्योगिकी का त्याग करना नहीं है, किंतु हमें प्रौद्योगिकी का दास नहीं बनना चाहिए। हम उद्योग केवल अपने लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के लिए करते हैं।

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भारत के अच्छे भविष्य के लिए हिन्दू समाज जिम्मेदार है – डॉ. मोहन भागवत जी

गंगापुर, छत्रपति संभाजीनगर (16 जनवरी 2026)।

हिन्दू धर्म, परंपरा, संस्कृति और मूल्यों की रक्षा हेतु  हिन्दू सम्मेलन समिति, गंगापुर ने भव्य “हिन्दू सम्मेलन” का आयोजन किया। हिन्दू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमें एक ऐसा बलशाली और चरित्रवान समाज बनाना है, जिससे दुनिया भी प्रभावित हो। इसके लिए हमें अपना स्वभाव और आचरण बदलना होगा। हिन्दू समाज ही भारत के अच्छे भविष्य के लिए ज़िम्मेदार है। इसलिए अच्छा परिवर्तन चाहिए तो स्वयं से शुरू करना होगा। उन्होंने पंच परिवर्तन का विषय सम्मेलन में उपस्थित समाज के समक्ष रखा।

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विदेश जाकर ज्ञान प्राप्ति करें, लेकिन उसका उपयोग भारत के लिए करें – डॉ. मोहन भागवत जी

छत्रपति संभाजीनगर, 16 जनवरी।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी छत्रपति संभाजीनगर के दो दिन के प्रवास पर हैं। उन्होंने संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित ‘युवा सम्मेलन’ में युवाओं से संवाद किया। सरसंघचालक जी ने कहा कि “भारत के विकास में युवाओं का योगदान ज़रूरी है। ज्ञान पाने के लिए विदेश जाने में कुछ गलत नहीं है, लेकिन उस ज्ञान का इस्तेमाल भारत के लिए किया जाना चाहिए। हमारे देश का भविष्य बनाने में युवाओं की ज़िम्मेदारी ज़रूरी है। आज का युवा देशभक्त है। युवाओं में देशभक्ति जितनी ज़्यादा होगी, वे देश के लिए उतना ही ज़्यादा काम करेंगे”। कई लोगों ने देश के फ़ायदे के लिए अपने ज्ञान और कुशलता का इस्तेमाल करने के लिए संघ के साथ काम किया है। संघ किसी से स्पर्धा नहीं करता, और किसी का विरोध भी नहीं करता। संघ बलशाली समाज निर्माण करना चाहता है। युवाओं से इस कार्य में अपना योगदान देने का आह्वान किया।

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संघ और चंद्रोदय मंदिर के भक्तों का उद्देश्य भारत को पुनः विश्व के आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित करना है – डॉ. मोहन भागवत जी

प्रभुपाद का जीवन संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत – मोहन भागवत

वृंदावन, 10 जनवरी 2026।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में आगमन पर मंदिर के भक्तों ने पारंपरिक वैदिक विधि के साथ स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर विराजमान श्रीश्री राधा वृंदावन चंद्र के दिव्य दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना कर समाज के कल्याण हेतु मंगलकामना की।

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संघ और डॉक्टर साहब समानार्थक शब्द हैं – डॉ. मोहन भागवत जी

‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष – शतक’ के गीतों का लोकार्पण

नई दिल्ली, 11 जनवरी 2026।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने केशव कुंज, झंडेवालान में आयोजित कार्यक्रम में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष – शतक’ फिल्म के दो गीतों ‘भारत मां के बच्चे, तथा ‘भगवा है मेरी पहचान’ का लोकार्पण किया। गीतों को गायक सुखविंदर सिंह ने आवाज दी है।

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धर्म का अर्थ पूजा-पद्धति नहीं; धर्म सबको साथ लेकर चलता है, सबका उत्थान करता है – डॉ. मोहन भागवत जी

हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती है; हिन्दू धार्मिक पहचान से बढ़कर, स्वभाव और प्रकृति है

भोपाल। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त भोपाल में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमारे मत-पंथ, सम्प्रदाय, भाषा, जाति अलग हो सकती है। लेकिन हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती है। हम सबकी एक संस्कृति और धर्म है। हम सबके पूर्वज समान हैं।

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जहां नारी का सम्मान और स्थान सुरक्षित होता है, वहां समाज स्वतः ही स्वस्थ रहता है – डॉ. मोहन भागवत जी

हमारा धर्म व संस्कृति मातृशक्ति के कारण ही सुरक्षित है, भोपाल में ‘मातृशक्ति संवाद’ में बोले सरसंघचालक जी

भोपाल। ‘मातृशक्ति संवाद’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जब हम सभ्य समाज की बात करते हैं तो उसमें महिलाओं की भूमिका स्वतः ही केंद्रीय हो जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारा धर्म, हमारी संस्कृति और हमारी सामाजिक व्यवस्था महिलाओं के कारण ही सुरक्षित है। अब वह समय चला गया, जब महिलाओं को केवल सुरक्षा की दृष्टि से घर तक सीमित रखा जाता था। आज परिवार और समाज दोनों को स्त्री और पुरुष मिलकर आगे बढ़ाते हैं, इसलिए दोनों का प्रबोधन आवश्यक है।

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सामाजिक सद्भाव नई अवधारणा नहीं, भारतीय समाज का स्वभाव रहा है – डॉ. मोहन भागवत जी

राष्ट्र निर्माण के लिए सभी एकजुट होकर कार्य करें – पंडित प्रदीप मिश्रा जी

भोपाल, 03 जनवरी 2026।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक सद्भाव कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज का स्वभाव रहा है। समाज में सज्जन शक्ति का जागरण, आचरण में पंच परिवर्तन और निरंतर सद्भावना संवाद आज की अनिवार्य आवश्यकता है। यह बैठक दो सत्रों में आयोजित की गई। प्रथम सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ हुआ। मंच पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी, प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी तथा मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडेय जी उपस्थित रहे। मध्यभारत प्रान्त के 16 शासकीय जिलों के समाज के विभिन्न वर्गों और संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता बैठक में रही।

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अपने धर्म-संस्कृति का संरक्षण कर, भारत को परम वैभव पर ले जाने का लक्ष्य लेकर कार्य कर रहा – डॉ. मोहन भागवत जी

भोपाल, 02 जनवरी 2026।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के प्रसंग पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का देशभर में प्रवास हो रहा है। इसी श्रृंखला में दो दिवसीय प्रवास के पहले दिन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि संघ अपने जन्म से ही लक्ष्य लेकर चल रहा है कि अपने धर्म-संस्कृति का संरक्षण कर, अपने भारत को परम वैभव पर लेकर जाना है। संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक यह प्रतिज्ञा करता है। कोई भी देश सम्पूर्ण समाज के योगदान से ही बड़ा होता है। नेता, नीति और व्यवस्था, ये सब तब सहायक होते हैं जब समाज गुण सम्पन्न होता है। भारत का युवा जाग गया है, वह अपने देश को समर्थ बनाना चाहता है। संघ युवाओं से आह्वान करता है कि वे संघ की शाखा में आएं या फिर संघ की योजना से चल रहे अपने रुचि के कार्य में जुड़कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।

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