फतेहगढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में गमांदेवी बस्ती द्वारा भव्य ‘हिंदू सम्मेलन’ का आयोजन स्थानीय आर. डी. लान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित सह प्रांत कार्यवाह प्रदीप भदोरिया को ने समाज को एकजुट होने और अपनी गौरवशाली संस्कृति पर गर्व करने का आह्वान किया।
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व्यवसाय के साथ राष्ट्र धर्म, समाज धर्म का भी पालन हो – दत्तात्रेय होसबाले जी
काशी, 24 जनवरी। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित युवा व्यवसायी सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि भारतीय उद्योगों में तकनीकी के साथ रोजगार सृजन भी आवश्यक है, हर हाथ को काम मिलना चाहिए। वर्तमान परिवेश में सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय का ध्यान रखना आवश्यक है। व्यवसाय को सुदृढ़ करने हेतु गांव से पलायन अनिवार्य नहीं है। व्यवसाय के साथ राष्ट्र धर्म, समाज धर्म का भी पालन हो।
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‘जाति’ भेद को व्यवहार से हटाने के पहले लिए मन से निकालना होगा – डॉ. मोहन भागवत जी
प्रमुख जन संगोष्ठी में सरसंघचालक जी का प्रबुद्ध नागरिकों से संवाद
छत्रपति संभाजीनगर, 17 जनवरी 2026।
संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित प्रमुखजन गोष्ठी में उपस्थित प्रबुद्ध नागरिकों ने अपनी जिज्ञासाएँ लिखित रूप में प्रस्तुत कीं, जिनका समाधान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने विस्तारपूर्वक किया। इस अवसर पर मंच पर प्रांत संघचालक अनिल भालेराव जी उपस्थित रहे।
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संघ किसी व्यक्ति या सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करता है – दत्तात्रेय होसबाले जी
समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव राष्ट्र की एकता के लिए घातक है
दरभंगा, 17 जनवरी 2026।
संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में प्रमुखजन संगोष्ठी का आयोजन आज डीएमसीएच ऑडिटोरियम, दरभंगा में किया गया। इस अवसर पर सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रबुद्धजनों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की सहभागिता रही।
समाज की शक्ति प्रत्येक वर्ग के सकारात्मक आचरण और आपसी समन्वय से निर्मित होती है – दत्तात्रेय होसबाले जी
जमशेदपुर, 11 जनवरी 2026।
संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त जमशेदपुर प्रवास के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने तीन समूहों में आयोजित संगोष्ठियों/बैठकों में सहभागिता की। पहली सामाजिक सद्भाव बैठक में विभिन्न जाति-वर्गों के 375 से अधिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। संत महात्माओं के साथ आयोजित बैठक में 170 प्रतिनिधि उपस्थित रहे, इसी प्रकार विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों के साथ आयोजित बैठक में 210 प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
समाज परिवर्तन के लिए सभी धार्मिक, सामाजिक संगठनों व सज्जन शक्ति को एकजुट होकर प्रयास करना होगा – दत्तात्रेय होसबाले जी
रोहतक। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त रोहतक के गोहाना रोड स्थित शिक्षा भारती वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में “सज्जन शक्ति की समाज परिवर्तन में भूमिका” विषय पर सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि भारत विश्व का मार्गदर्शन कर सके इसके लिए देश को आंतरिक तौर पर मजबूत करना होगा, आंतरिक ताकत देनी होगी और संघ पिछले 100 वर्षों से इसके लिए ही कार्यरत है। देश को आंतरिक तौर पर मजबूत करने के लिए समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट होकर आगे आना होगा। सद्भाव के साथ सभी महापुरुषों की जयंती मिलकर मनानी होगी, तभी राष्ट्र मजबूत होगा और जात-पात की खाई को पाटा जा सकेगा।
धर्म का अर्थ पूजा-पद्धति नहीं; धर्म सबको साथ लेकर चलता है, सबका उत्थान करता है – डॉ. मोहन भागवत जी
हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती है; हिन्दू धार्मिक पहचान से बढ़कर, स्वभाव और प्रकृति है
भोपाल। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त भोपाल में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमारे मत-पंथ, सम्प्रदाय, भाषा, जाति अलग हो सकती है। लेकिन हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती है। हम सबकी एक संस्कृति और धर्म है। हम सबके पूर्वज समान हैं।
जहां नारी का सम्मान और स्थान सुरक्षित होता है, वहां समाज स्वतः ही स्वस्थ रहता है – डॉ. मोहन भागवत जी
हमारा धर्म व संस्कृति मातृशक्ति के कारण ही सुरक्षित है, भोपाल में ‘मातृशक्ति संवाद’ में बोले सरसंघचालक जी
भोपाल। ‘मातृशक्ति संवाद’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जब हम सभ्य समाज की बात करते हैं तो उसमें महिलाओं की भूमिका स्वतः ही केंद्रीय हो जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारा धर्म, हमारी संस्कृति और हमारी सामाजिक व्यवस्था महिलाओं के कारण ही सुरक्षित है। अब वह समय चला गया, जब महिलाओं को केवल सुरक्षा की दृष्टि से घर तक सीमित रखा जाता था। आज परिवार और समाज दोनों को स्त्री और पुरुष मिलकर आगे बढ़ाते हैं, इसलिए दोनों का प्रबोधन आवश्यक है।
अपने धर्म-संस्कृति का संरक्षण कर, भारत को परम वैभव पर ले जाने का लक्ष्य लेकर कार्य कर रहा – डॉ. मोहन भागवत जी
भोपाल, 02 जनवरी 2026।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के प्रसंग पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का देशभर में प्रवास हो रहा है। इसी श्रृंखला में दो दिवसीय प्रवास के पहले दिन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि संघ अपने जन्म से ही लक्ष्य लेकर चल रहा है कि अपने धर्म-संस्कृति का संरक्षण कर, अपने भारत को परम वैभव पर लेकर जाना है। संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक यह प्रतिज्ञा करता है। कोई भी देश सम्पूर्ण समाज के योगदान से ही बड़ा होता है। नेता, नीति और व्यवस्था, ये सब तब सहायक होते हैं जब समाज गुण सम्पन्न होता है। भारत का युवा जाग गया है, वह अपने देश को समर्थ बनाना चाहता है। संघ युवाओं से आह्वान करता है कि वे संघ की शाखा में आएं या फिर संघ की योजना से चल रहे अपने रुचि के कार्य में जुड़कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।
वंचित को सशक्त करना हो समाज का उद्देश्य – डॉ. मोहन भागवत जी
सामाजिक सद्भाव से अनेक चुनौतियों का समाधान संभव; संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त सद्भाव बैठक का आयोजन
रायपुर, 01 जनवरी 2026। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आज स्थानीय श्री राम मंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में विभिन्न जाति, समाज, पंथ के पाँच सौ से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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