मन मिलने का भाव ही सामाजिक सद्‌भाव – वीरेन्द्र मिश्रा जी

कानपुर 17 मई। हिन्दुत्व के नाम पर हम एकजुट है जिससे देश में ही नहीं विश्व में हमारी ताकत बढ़ी है जबकि हम सभी सामाजिक सद्‌भाव में अभी पीछे है। सद‌भाव का अर्थ एक दूसरे के प्रति भ्रातृत्व का भाव होना है। उक्त विचार प्रान्त सामाजिक सद‌भाव प्रमुख वीरेन्द्र मिश्र ने विश्व बैंक बर्रा स्थित कैम्ब्रिज इण्टर कालेज में रविवार को आयोजित सामाजिक सद‌भाव बैठक में व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि आपस में भाईचारा, धार्मिक व पारिवारिक शिष्टाचार ठीक हो और आत्मा व मन मिलने का भाव ही सद्‌भाव है। भाग सदभाव प्रमुख अम्बुज जी ने कहा कि महापुरुषों ने किसी भी समाज में जन्म लिया हो किन्तु उन्होने सर्वसमाज के कल्याण के लिए कार्य किये है। बैठक में अखिल भारतीय क्षत्रिय समाज के मनोज भदौरिया जी, डा.यू.एस. सिंह जी, जितेन्द्र चन्देल जी, विमल सिंह जी, बिट्टू परिहार जी, कोरी समाज के डा० राम सहाय जी, रामजीवन जी, विश्नोई समाज के पी० के. विश्नोई जी, ब्राहम्मण समाज के शिवशंकर तिवारी जी, दुर्गेश मणि त्रिपाठी जी, कोली समाज के राजेश जी, कुर्मी समाज के विजय सचान जी, योगेन्द्र सचान जी, कायस्थ महासभा के प्रमोद निगम जी, श्री यज्ञसेनी महासभा के मनोज गुप्ता जी, सदगुरु कबीर‌धाम तिलसड़‌ के महन्त सुदर्शन जी, ब्रम्हकुमारी समाज सहित अनेक समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर नगर सह संघ चालक अनिल शुक्ला जी, विष्णु सचान जी, सुबोध जी, श्याम देव वाल्मीकि जी, विशाल गुप्ता जी, प्रभात कुमार जी आदि मौजूद थे।

वहीं गुजैनी स्थित रतनचन्द्र खत्री सरस्वती शिशु मन्दिर इन्टर कालेज में हुयी सामाजिक सदभाव बैठक में भाग संघ चालक राधेश्याम सिंह जी एवं भाग कार्यवाह सुशील कटियार जी सहित कायस्थ समाज के दीपक जी, आदित्य जी, क्षत्रिय समाज के सदानन्द जी, लक्ष्मण जी, कुशवाह समाज के राधेश्याम जी, विश्वकर्मा समाज के रोशनलाल जी, पाल समाज के रामनाथ पाल जी, ब्राहम्ण समाज के प्रदीप जी, रमापति जी, सत्येन्द्र जी, कुर्मी समाज के राज बहादुर जी व रामसेवक सचान जी ने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर अनेक समाज के 80 प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे।

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