आज के कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि आदरणीय डॉ. कोपिल्लिल राधाकृष्णन जी, मंच पर उपस्थित विदर्भ प्रांत के मा. संघचालक, मा. सह संघचालक, नागपुर महानगर के मा. संघचालक, अन्य अधिकारी गण, नागरिक सज्जन, माता भगिनी तथा आत्मीय स्वयंसेवक बन्धु । पढ़ना जारी रखें “प. पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत द्वारा विजयादशमी उत्सव-2024 के अवसर पर दिया गया उद्बोधन एवं सम्पूर्ण वीडियो”
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भारत में भारत के लिए जिम्मेदार समाज कौन सा है – पू. सरसंघचालक जी
भारत में भारत के लिए जिम्मेदार समाज कौन सा है – पू. सरसंघचालक जी
नित्य शाखा से ही समाज के लिए योग्य व्यक्ति निर्मित होंगे – डॉ. मोहन भागवत जी
सरसंघचालक जी ने प्यारेराम प्राचीन मंदिर के किए दर्शन, स्वयंसेवकों के साथ आंवला, बिल्वपत्र, पीपल आदि के 51 पौधों का किया रोपण
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संघ केवल संगठन मात्र नहीं, अपितु भारत के नवोत्थान का अभियान है : दत्तात्रेय होसबाले जी
जैसलमेर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने जैसलमेर प्रवास के दौरान बुधवार को शहीद पूनमसिंह स्टेडियम में बलिदानी पूनम सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया. तत्पश्चात नगर एकत्रीकरण में स्वयंसेवकों के प्रबोधन में कहा कि संघ केवल एक संगठन मात्र नहीं है, अपितु भारत के नवोत्थान एवं सर्वप्रकार के पुनरोदय का महाभियान है. राष्ट्र जीवन का महत्वपूर्ण आंदोलन है. सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस ने संघ को परिभाषित करते हुए कहा है – संघ ही भारत में लोकतंत्र की सुरक्षा और सुरक्षा की गारंटी है. सेना और पुलिस के समान संघ देश का सुरक्षा कवच है. सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश रहे श्री थॉमस के शब्दों से संघ की भूमिका को आसानी से समझा जा सकता है.
डॉ. मोहन भागवत ने धरमपेठ महिला स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी सभागार में श्री गुरुजी के तैलचित्र का किया अनावरण
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि पूज्य गुरुजी के सारे काम धर्म के विश्लेषण से चलते थे, संघ का काम भी उसी प्रकार से चलता है. अपना समाज संगठित ही रहना चाहिये. आपसी सहयोग से हमें समर्थ होना पड़ेगा और समाज को भी समर्थ बनाना पड़ेगा. हम जो कुछ करते हैं, वह धर्म है. उसे निष्ठा और प्रामाणिकता से स्वीकारना होगा.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक, पालक्काड, केरल – 31 अगस्त 2024
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक 31 अगस्त, 1-2 सितंबर 2024 को केरल के पालक्काड में होगी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक इस वर्ष केरल के पालक्काड में 31 अगस्त एवं 1 तथा 2 सितंबर 2024 को आयोजित हो रही है। तीन दिवसीय यह अखिल भारतीय बैठक सामान्यतः वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है। पिछले वर्ष यह बैठक सितंबर 2023 में पुणे में संपन्न हुई थी। इस अखिल भारतीय समन्वय बैठक में संघ प्रेरित विविध संगठनों में कार्यरत संगठन के प्रमुख पदाधिकारी सहभागी होते हैं। यह सभी संगठन समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के सकारात्मक कार्यों में लोकतांत्रिक पद्धति से सामाजिक परिवर्तन के कार्य में सक्रिय रहते है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख बालकृष्ण जी का निधन
कानपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख एवं अवध प्रांत के पूर्व प्रांत प्रचारक श्रीमान बालकृष्ण जी का निधन आज प्रात: राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान लखनऊ में हो गया। श्री बालकृष्ण जी के पार्थिव देह के अन्तिम दर्शन भारती भवन, लखनऊ में प्रात: 7:30 से 10:00 बजे तक हुये। इसके बाद श्री बाल जी के कानपुर में पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन प्रान्तीय कार्यालय केशव भवन में 12:30 से 2:00 तक दर्शन हुए। उनका अन्तिम संस्कार आज 3:00 बजे अपराह्न गंगा तट, भैरों घाट, कानपुर में सम्पन्न हुआ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक 31 अगस्त-1-2 सितंबर 2024 को केरल के पालक्काड में
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक इस वर्ष केरल के पालक्काड में इस माह दिनांक 31 अगस्त एवं 1 तथा 2 सितंबर 2024 को आयोजित हो रही है। तीन दिवसीय यह अखिल भारतीय बैठक सामान्यतः वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है। पिछले वर्ष यह बैठक सितंबर 2023 में पुणे में संपन्न हुई थी। इस अखिल भारतीय समन्वय बैठक में संघ प्रेरित विविध संगठनों में कार्यरत संगठन के प्रमुख पदाधिकारी सहभागी होते हैं। यह सभी संगठन समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के सकारात्मक कार्यों में लोकतांत्रिक पद्धति से सामाजिक परिवर्तन के कार्य में सक्रिय रहते है।
‘अथातो बिंब जिज्ञासा’ विवेक जगाने वाला ग्रंथ : डॉ. मोहन भागवत
पुणे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि वर्तमान में विश्व विभिन्न मार्गों पर लड़खड़ा रहा है, रुका हुआ है. उसे भारत की परंपराओं से प्राप्त ज्ञान की आवश्यकता है. वह हमारे ज्ञान, भक्ति और कर्म के त्रिवेणी संगम से दिखा सकते हैं. वह दृष्टि देने का कार्य डॉ. देगलूरकर के ग्रंथ के माध्यम से हुआ है. ‘अथातो बिंब जिज्ञासा’ ग्रंथ विवेक जगाने वाला ग्रंथ है.
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