कानपुर, 4 मई। आरोग्य भारती स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाला एक सेवा संगठन है। विज्ञान व तकनीकी के उत्तरोत्तर विकास के कारण व्यक्तियों के रहन-सहन, आहार-विहार, कार्यशैली, सोचने की पद्धति आदि में निरंतर परिवर्तन हो रहा है। विकृत जीवन शैली के कारण जीवन शैली जनित रोग एवं मानसिक तनाव संबंधी रोग बढ़ रहे हैं।

उक्त विचार आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डा० अशोक कुमार वार्ष्णेय ने जवाहर नगर स्थित ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन में आयोजित कानपुर प्रान्त अभ्यास वर्ग में व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि 2 नवम्बर 2002 को कोच्चि में आरोग्य भारती का गठन हुआ था। वर्तमान में 43 प्रान्तों के 857 जिलों में आरोग्य भारती का विस्तार है। देश में तेइस हजार आरोग्य मित्र, पंद्रह हजार नियमित योग केन्द्र एवं पाँच हजार विद्यालयों में नियमित कार्यक्रम आरोग्य भारती के बैनर तले चल रहे हैं। मुख्य अतिथि इंजी. गौरव भदौरिया ने कहा कि आरोग्य भारती स्वास्थ्य के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रही है। आरोग्य भारती के मिशन में महाराणा प्रताप ग्रुप अपने सभी संसाधनों से सहायता करेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संयोजक संग्राम सिंह कार्यक्रम के विशेष अतिथि थे। कानपुर प्रान्त संरक्षक डा० अंगद सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। धन्वंतरी स्तवन पाठ दिग्विजय सिंह ने किया। अतिथि स्वागत बी. आर. गुप्ता ने किया एवं परिचय प्रान्त सचिव श्याम सुन्दर गुप्ता ने दिया। संचालन नमिता दुबे एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रान्त अध्यक्ष डा० बी. एन. आचार्य ने दिया।
शैक्षिक सत्र में गर्भ संस्कार विषय पर डा० संगीता सारस्वत ने कहा कि गर्भ संस्कार अति आवश्यक है क्योंकि बच्चा गर्भ में रहते हुए बहुत कुछ सीख लेता है। गर्भवती माता का प्रशिक्षण जरूरी है। माँ जैसा चाहे वैसा ही पुत्र को बना सकती है। पर्यावरण विषय पर डा० संजीवनी शर्मा ने कहा कि प्लास्टिक कलियुग का राक्षस है जो भेष बदलकर शरीर में केमिकल लोचा कर हमें बीमार कर देता है। हमारे भोजन, पानी, हवा में माइक्रो प्लास्टिक है जो हमारे शरीर में चली जाती है। इसी से प्रजनन क्षमता में कमी, कैंसर, मधुमेह जैसी घातक बीमारियाँ हो रही हैं। प्लास्टिक पर्यावरण की नहीं बल्कि हमारी समस्या है। आध्यात्मिक स्वास्थ्य पर श्याम सुन्दर गुप्ता ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर रमाकान्त पाण्डे, डॉ. शरद द्विवेदी, डॉ. अनिल चतुर्वेदी, डॉ. मनमीत सिंह, तरुण खरे, शशि गुप्ता, बी० आर० गुप्ता, दयाशंकर शुक्ला, उषा गुप्ता, डा० पूनम बुधरानी, अरविंद पाण्डेय, डॉ. मनीष यादव, रवीन्द्र तिवारी सहित 21 जिलों के 123 सक्रिय कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
