• कानपुर के शास्त्री नगर में RSS द्वारा ‘स्वर शतकम’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन
• डॉ. अम्बेडकर की जयंती पर घोष वादकों ने निकाला पथ संचलन
• शताब्दी वर्ष में समाज से ‘पंच परिवर्तन’ को अपनाने का आह्वान

कानपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय शारीरिक शिक्षण प्रमुख श्री जगदीश प्रसाद जी ने कहा कि संघ की अडिग विचार पद्धति और अनुशासन का ही परिणाम है कि आज लाखों हिंदू एक आवाज पर एक साथ चलते हैं। वे मंगलवार को कानपुर विभाग द्वारा शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल पार्क में आयोजित ‘स्वर शतकम’ कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
डॉ. अम्बेडकर के योगदान का स्मरण

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता ने बाबा साहेब को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, “बाबा साहेब केवल संविधान निर्माता नहीं, बल्कि समाज सुधारक और प्रखर विद्वान थे, जिन्होंने अंतिम पंक्ति के व्यक्ति की पीड़ा को समझा। उनके जीवन पर महात्मा बुद्ध, संत कबीर और ज्योतिबा फूले के विचारों का गहरा प्रभाव था।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार और डॉ. अम्बेडकर, दोनों का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में ही हुआ था।
संघ का विस्तार और कार्यपद्धति
श्री जगदीश प्रसाद ने बताया कि 1925 में नागपुर में एक शाखा से शुरू हुआ संघ आज 52 देशों तक पहुंच चुका है। वर्तमान में 42 से अधिक संगठन राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत हैं और 5,000 से अधिक प्रचारक पूर्णकालिक सेवा दे रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि संघ में स्वयंसेवक प्रशिक्षण के लिए स्वयं शुल्क देता है और कठिन परिस्थितियों एवं प्रतिबंधों के बावजूद संघ निरंतर आगे बढ़ा है।
समाज के लिए ‘पंच परिवर्तन’ का आह्वान
संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में उन्होंने समाज से पांच प्रमुख सिद्धांतों को जीवन में उतारने की अपील की:
1. सामाजिक समरसता
2. स्व भाव (स्वदेशी व गौरव)
3. पर्यावरण संरक्षण
4. नागरिक कर्तव्य
5. कुटुम्ब प्रबोधन
भव्य पथ संचलन और घोष प्रदर्शन

कार्यक्रम के दौरान कानपुर के चारों भागों (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) के घोष वादकों ने शंख, वेणु, आनक और प्रणव जैसे वाद्यों से ‘रण संगीत’ की मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके पश्चात सेंट्रल पार्क से भव्य पथ संचलन निकाला गया, जो शास्त्री नगर सब्जी मंडी और लाजपत नगर होते हुए गुजरा। स्थानीय निवासियों ने पुष्प वर्षा कर घोष वादकों का उत्साहवर्धन किया।

