कानपुर, 2 सितंबर 2026
आरोग्य भारती कानपुर प्रांत द्वारा आयोजित एक दिवसीय ‘आरोग्य मित्र प्रशिक्षण’ का सफल आयोजन जवाहर नगर स्थित ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में हुआ। इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में 40 समर्पित कार्यकर्ताओं और लगभग 150 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के प्रत्येक घर में स्वास्थ्य जागरूकता और आपातकालीन जीवनरक्षक कौशल पहुंचाना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान धन्वंतरि के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। श्री दिग्विजय सिंह चंदेल ने धन्वंतरि स्तवन प्रस्तुत किया तथा उद्घाटन सत्र का कुशल संचालन श्रीमती नमिता दुबे ने किया।
उद्घाटन सत्र के दौरान मंच पर प्रमुख गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे:
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डॉ. श्याम बाबू गुप्ता (विभाग संघचालक, कानपुर नगर – मुख्य अतिथि)
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संजीवन जी (अखिल भारतीय आरोग्य मित्र प्रशिक्षण प्रमुख)
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डॉ. अंगद सिंह जी (प्रांत संरक्षक एवं प्रख्यात शिक्षाविद)
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संग्राम सिंह जी (पूर्वी क्षेत्र प्रचारक)
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डॉ. बी. एन. आचार्य जी (प्रांत अध्यक्ष)
स्वस्थ भारत का संकल्प: “स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ राष्ट्र”
प्रांत अध्यक्ष डॉ. बी. एन. आचार्य जी ने आरोग्य भारती के इतिहास और उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी स्थापना वर्ष 2002 में कोच्चि में हुई थी। संगठन का मूल विचार स्वस्थ जीवनशैली के जरिए “स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार, स्वस्थ ग्राम एवं स्वस्थ राष्ट्र” का निर्माण करना है।
मुख्य अतिथि डॉ. श्याम बाबू गुप्ता जी ने आरोग्य भारती के देशव्यापी विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि आज यह संगठन जिलों से लेकर बस्तियों तक पहुंच चुका है। उन्होंने भारतीय रसोई को “स्वास्थ्य का खजाना” बताते हुए दादी-नानी के पारंपरिक नुस्खों के महत्व को रेखांकित किया।
व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र: CPR और DRABC सूत्र
प्रशिक्षण के तकनीकी और व्यावहारिक सत्र में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आपातकालीन चिकित्सा पद्धतियों का सीधा अभ्यास कराया।
1. CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटैशन) प्रशिक्षण
पारस हेल्थ केयर के डॉ. राहुल जी ने मेडिकल डमी के माध्यम से सीपीआर का व्यावहारिक अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि कार्डियक अरेस्ट या सांस रुकने की आपात स्थिति में सीपीआर देने से मस्तिष्क तक ऑक्सीजन और रक्त का प्रवाह बना रहता है, जिससे मरीज को अस्पताल पहुंचाने तक बहुमूल्य समय मिल जाता है।
2. प्राथमिक उपचार का DRABC सूत्र
डॉ. वी. एन. त्रिपाठी जी ने कार्यकर्ताओं को प्राथमिक चिकित्सा के मूलभूत सिद्धांतों की जानकारी दी। उन्होंने जीवन रक्षा के लिए DRABC का सूत्र समझाया:
| अक्षर | अर्थ (Hindi) | कार्य |
| D | Danger Zone | मरीज को खतरे वाले स्थान से सुरक्षित बाहर निकालना |
| R | Response | मरीज की चेतना और प्रतिक्रिया जांचना |
| A | Airway | श्वसन मार्ग में रुकावट को साफ करना |
| B | Breathing | मरीज की सांसों की स्थिति देखना |
| C | Circulation | नाड़ी/रक्त संचार की जांच करना |
उन्होंने प्रत्येक घर में फर्स्ट-एड किट और ORS रखने पर बल देते हुए “एक सांस देना, एक जान बचाना” का संदेश दिया।
आरोग्य मित्र निर्माण के 11 प्रमुख आयाम
अखिल भारतीय प्रशिक्षण प्रमुख श्री संजीवन जी ने बताया कि आरोग्य भारती 11 प्रमुख विषयों पर केंद्रित होकर कार्य करती है:
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प्राथमिक उपचार
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घरेलू उपचार
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वनौषधि
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पर्यावरण
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योग
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सुपोषण
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व्यसन मुक्ति
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स्वास्थ्य परीक्षण
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नागरिक कर्तव्य
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आध्यात्मिक स्वास्थ्य
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स्वस्थ जीवनशैली
उन्होंने जिला, नगर, खंड और बस्ती स्तर पर आरोग्य मित्रों की एक व्यापक श्रृंखला बनाने पर जोर दिया जो महिला स्वास्थ्य, विद्यालय स्वास्थ्य और गर्भ संस्कार जैसे अभियानों को आगे बढ़ाएगी।
एक्यूप्रेशर एवं समापन
अंतिम सत्र में डॉ. देवेश तिवारी जी ने एक्यूप्रेशर के महत्वपूर्ण बिंदुओं का प्रदर्शन किया और दैनिक जीवन में इसके उपयोग बताए।
कार्यक्रम के अंत में कॉलेज प्रशासन, अतिथियों और सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया गया। श्री दिग्विजय सिंह चंदेल द्वारा शांति मंत्र के साथ प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: आरोग्य भारती की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?
उत्तर: आरोग्य भारती की स्थापना वर्ष 2002 में कोच्चि (केरला) में हुई थी।
Q2: प्राथमिक उपचार में DRABC का क्या मतलब होता है?
उत्तर: DRABC एक आपातकालीन सूत्र है – D (Danger Zone), R (Response), A (Airway), B (Breathing), और C (Circulation)।
Q3: आरोग्य मित्र प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: हर घर में एक सजग आरोग्य मित्र तैयार करना जो प्राथमिक उपचार, योग, सुपोषण और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति समाज को जागरूक कर सके।

