स्क्रीन से बाहर निकल राष्ट्र निर्माण की साधना में जुटें युवा : श्री सुनील अंबेकर जी

कानपुर | 24 अगस्त 2026
महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (MPGI) परिसर स्थित एन-ब्लॉक सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष सत्र में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील अंबेकर जी ने युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करते हुए उनके प्रश्नों के उत्तर दिए और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में दीप प्रज्ज्वलन कर RSS शताब्दी वर्ष युवा संवाद कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर जी व अन्य अतिथिगण।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की मैनेजिंग डायरेक्टर सुश्री भुवनप्रिया जी ने की, जबकि संचालन कंप्यूटर विभाग के विभागाध्यक्ष श्री मयंक शुक्ला जी द्वारा संपन्न हुआ।

औपनिवेशिक शिक्षा नीति और भारतीय स्वाधीनता का संकल्प

युवाओं को संबोधित करते हुए श्री सुनील अंबेकर जी ने भारत के ऐतिहासिक संघर्ष और औपनिवेशिक शिक्षा के प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब ब्रिटिश शिक्षा नीति भारत आई, तो उसने हमारे पारंपरिक ज्ञान और सोच को बाधित करने का प्रयास किया। इसके बावजूद, भारतीय युवाओं के मन में देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना समाप्त नहीं हुई।
युवा अनुशीलन समिति से जुड़े और नागपुर में नेशनल कांग्रेस में सक्रिय हुए। युवाओं के मन में यह विचार स्पष्ट था कि भारत दुनिया के अन्य देशों से भिन्न है, जो प्रायः भाषा के आधार पर बने हैं। देश की स्वाधीनता का आंदोलन अनवरत चलता रहे, इसी उद्देश्य से संघ का निर्माण हुआ।

महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में RSS शताब्दी वर्ष युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान संबोधित करते संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर जी।

संघ का मूल विचार: ‘स्वयं से सेवा’ और आत्म-प्रबंधन

श्री सुनील अंबेकर जी ने स्पष्ट किया कि संघ का मूल विचार समाज की सक्रियता और समझ पर आधारित है। उन्होंने धर्म को किसी संकीर्ण दायरे से परे ‘यूनिवर्सल रूल’ (सार्वभौमिक नियम) और ‘स्वयं से सेवा’ के रूप में रेखांकित किया।
  • आत्म-प्रबंधन: संघ में प्रतिदिन मनोव्यायाम और आत्म-नियंत्रण का अभ्यास कराया जाता है। यदि व्यक्ति का स्वयं पर नियंत्रण मजबूत है, तो वह जीवन में किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकता है।
  • लोकतंत्र की पुनर्स्थापना: आपातकाल के कठिन 19 महीनों के दौरान लोकतंत्र की पुनर्स्थापना में संघ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
  • सांस्कृतिक गौरव: हमारी संस्कृति की पहचान पूरी दुनिया के कल्याण की सोच में निहित है। हमारे पूर्वजों ने कभी ऐसा कोई कार्य नहीं किया जिससे हमें विदेशों में क्षमा मांगनी पड़े।

महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में RSS शताब्दी वर्ष युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर जी।

जमीनी अनुभव और ‘ब्रेन ड्रेन’ का समाधान

युवाओं को केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित न रहने की सलाह देते हुए श्री अंबेकर जी ने कहा कि सोशल मीडिया पर सक्रियता अच्छी बात है, लेकिन युवाओं की ऊर्जा केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
  1. व्यावहारिक अनुभव: युवाओं को गाँवों और जमीनी स्तर पर जाकर कार्य करना चाहिए, जिससे राष्ट्रीय शासन और नेतृत्व की गहरी व्यावहारिक समझ विकसित होती है।
  2. जड़ों से जुड़ाव: ‘ब्रेन ड्रेन’ की चुनौती से निपटने और विश्व को भारतीय दृष्टि देने के लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहना आवश्यक है।
  3. संस्कृति और तकनीक का संगम: पश्चिमी प्रभाव के दौर में आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ अपनी संस्कृत भाषा, राष्ट्रभाषा और सांस्कृतिक विरासत का समन्वय स्थापित करना होगा।
“18 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं की नई ऊर्जा के साथ हम एक नया भारत और अर्थव्यवस्था का एक नया मॉडल बनाएंगे। आरक्षण और सामाजिक समरसता पर हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है—हर वर्ग का कल्याण और विकास ही राष्ट्र का मुख्य ध्येय है।”श्री सुनील अंबेकर जी

महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में RSS शताब्दी वर्ष युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान संबोधित करते महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की मैनेजिंग डायरेक्टर सुश्री भुवनप्रिया जी।

अधिकारों के साथ कर्तव्यों का बोध आवश्यक: सुश्री भुवनप्रिया जी

अध्यक्षीय उद्बोधन में महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की मैनेजिंग डायरेक्टर सुश्री भुवनप्रिया जी ने युवाओं को उनके सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को समझना होगा तथा शिक्षा, अनुशासन, संस्कार और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना होगा।

गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ गायन से हुआ और समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उ.प्र. के सह क्षेत्र कार्यवाह श्री अनिल श्रीवास्तव जी, सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख श्री मनोजकान्त जी, कानपुर प्रांत के सह प्रांत प्रचारक श्री मुनीश जी, प्रांत कार्यवाह श्री रामकेश जी, विभाग प्रचारक श्री बैरिस्टर जी, MPGI के डायरेक्टर डॉ. विवेक कुमार सिंह जी, डॉ. शिवानी कपूर जी सहित भारी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में RSS शताब्दी वर्ष युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रोतागण।

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