भारत विश्व का कल्याण चाहने वाला देश है – डॉ. मोहन भागवत जी

सीकर, 12 अगस्त। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत दुनिया में धर्म देने वाला और विश्व का कल्याण चाहने वाला देश है। यहां वेदों में सभी शास्त्र निहित हैं, ऋषियों की तपस्या से राष्ट्र में बल और ओज का संचार हुआ है।

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‘विश्व मूलनिवासी दिवस’ : भारत में प्रासंगिकता या विभाजन का षड्यंत्र?

हर साल 9 अगस्त को ‘विश्व मूलनिवासी दिवस’ दुनियाभर में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य उन मूलनिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना है, जिन पर उपनिवेशवाद या साम्राज्यवाद के दौरान अमानवीय अत्याचार हुए। परंतु प्रश्न यह है कि क्या यह दिवस भारत के लिए प्रासंगिक है? या इसे भारत के सामाजिक ताने-बाने में फूट डालने के षड्यंत्र के रूप में कुछ शक्तियाँ भुना रही हैं?

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शताब्दी वर्ष के निमित्त समाज की प्रमुख हस्तियों से संवाद करेगा संघ : सुनील आंबेकर

26, 27, 28 अगस्त को विज्ञान भवन में तीन दिवसीय व्याख्यानमाला

देश के चार महानगरों सहित 1000 से अधिक स्थानों पर गोष्ठियों का होगा आयोजन

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संस्कृत को राजाश्रय के साथ ही जनाश्रय भी मिले – डॉ. मोहन भागवत जी

आत्मनिर्भर भारत के लिए अपने ‘स्व’ को समझना होगा

नागपुर (01 अगस्त, 2025)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियाँ और देश का नेतृत्व हमें बता रहे हैं कि भारत को अब आत्मनिर्भर बनना चाहिए। हमें अपने बल पर प्रगति करनी होगी। सभी प्रकार के बल में वृद्धि होनी चाहिए। यदि हमें आत्मनिर्भर बनना है, तो हमें अपने स्व को पूरी तरह से समझना होगा।

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पूर्व प्रयत्न और संघ स्थापना

कोलकाता में त्रैलोक्यनाथ चक्रवर्ती प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे, बाद में वे दिल्ली आए। जब 1989 में हम लोगों ने डॉ. हेडगेवार जी की जन्मशताब्दी मनाई तो उस समय उनको शताब्दी समिति में लेने के लिए हमारे कार्यकर्ता उनके पास गए थे, उन्होंने सहमति दे दी। तब उन्होंने कहा – 1911 में एक बार डॉ. हेडगेवार मेरे घर आए थे। उस समय डॉ. हेडगेवार ने यह बात कही थी कि दादा लगता है, इस समाज को कुछ ट्रेनिंग देने की आवश्यकता है और यह ट्रेनिंग देने की फुर्सत किसी को नहीं है, सबने अपना-अपना काम चुन लिया है। मुझे लगता है कि यह काम मुझे ही करना पड़ेगा।

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A Call for Educational Transformation from the Birthplace of Adi Shankaracharya

Kerala, 25 July 2025. The National Chintan Baithak of Shiksha Sanskriti Utthan Nyas was inaugurated by the RSS Sarsanghchalak Dr. Mohan Bhagwat Ji. On this occasion Swami Vivitananda Ji of Chinmaya Mission, President of the Nyas Dr. Pankaj Mittal Ji, Convenor A Vinod Ji, Sudarshan Ji of Chinmaya Mission were present.

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BMS@70, Ocassion to celebrate and introspect : Sarasanghachalak Dr. Mohanji Bhagwat

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बीएमएस का 70 वर्ष पूर्ण होना आत्म-अवलोकन का भी अवसर है : डॉ. मोहन भागवत

नई दिल्ली. भारतीय मज़दूर संघ (BMS) ने अपने 70 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वर्षभर चले आयोजनों की श्रृंखला का भव्य समापन समारोह 23 जुलाई 2025 को नई दिल्ली के के.डी. जाधव कुश्ती हॉल, इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, विशिष्ठ अतिथि के रूप में केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडविया एवं अध्यक्षता बीएमएस अध्यक्ष हिरानमय पांडेय द्वारा की गई।

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राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय कार्यकारिणी एवं प्रतिनिधियों की अर्धवार्षिक बैठक हुई प्रारंभ

राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय कार्यकारिणी एवं प्रतिनिधियों की अर्धवार्षिक बैठक आज 18 जुलाई 2025 से प्रमुख संचालिका श्रीमती शांता कुमारी के करकमलों द्वारा दीप प्रज्जवलन कर रेशिम बाग, स्मृति मंदिर, नागपुर में प्रारंभ हुई। समिति की इस बैठक में 38 प्रांतों से लगभग 500 प्रतिनिधि सेविकाएं सहभागी हुई। आज उद्घाटन सत्र में प्रमुख कार्यवाहिका सीता गायत्री अन्नदानम् ने समिति कार्य का वृत्त दिया और साथ ही शिक्षा वर्गों की समीक्षा की।

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Time for Trade Unions to Transform – From Charters of Demands to Centres of Command

By Virjesh Upadhyay

Director General, Dattopant Thengadi Foundation

Trade unions in Bharat stand today at a critical crossroads. For decades, they have focused on issuing charters of demands – lists of expectations from employers and policymakers. But the world of work has changed fundamentally, and with it must change the very purpose, mindset and functioning of our unions.

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