देवर्षि नारद जयन्ती – ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया

भारत की भूमि संतों की भूमि है। भारत अपनी सनातनी परंपरा के द्वारा ही विकसित हुआ है। भारत का मौलिक स्वरूप आध्यात्मिक है। ज्ञान के प्रति निष्ठावान लोगों की भूमि ही भारत है।  इसलिए भारत का जनजीवन, भारत की लोक परम्पराएँ, भारत की संस्कृति, भारत की राजनीति सभी का मूल भारत की आध्यात्मिक परंपरा में खोजा जा सकता है। यही कारण है कि आज भी भारत के जनमानस में भारत के संतों और आध्यात्मिक गुरुओं के प्रति विशेष सम्मान और श्रद्धा दिखाई देती है।

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देश के 857 जिलों में आरोग्य भारती का विस्तार – डा० अशोक कुमार वार्ष्णेय

कानपुर, 4 मई। आरोग्य भारती स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाला एक सेवा संगठन है। विज्ञान व तकनीकी के उत्तरोत्तर विकास के कारण व्यक्तियों के रहन-सहन, आहार-विहार, कार्यशैली, सोचने की पद्धति आदि में निरंतर परिवर्तन हो रहा है। विकृत जीवन शैली के कारण जीवन शैली जनित रोग एवं मानसिक तनाव संबंधी रोग बढ़ रहे हैं।

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जगतगुरु आदि शंकराचार्य

श्री शंकराचार्य : संक्षिप्त परिचय

  • श्री शंकराचार्य का जन्म 8वीं शताब्दी में हुआ था, उनका जन्म स्थान केरलमाना जाता है। उनके पिता का नाम शिवगुरु था। उनका मूल नाम शंकर था, लेकिन उन्हें श्री शंकराचार्य के रूप में प्रसिद्धि मिली।
  • श्री शंकराचार्य ने जल्द ही ज्ञान की प्राप्ति की और बालक के रूप में ही उनकी असाधारण विद्वत्ता का परिचय हो गया। उन्होंने भारतीय दर्शन और वेदांत के कई महत्वपूर्ण ग्रन्थों का अध्ययन किया और उन्होंने अद्वैत वेदांत पर विशेष ध्यान दिया।

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जो अपने को हिंदू कहता है सबसे पहले इस देश के प्रति उसकी जवाबदेही है : डॉ. मोहन भागवत

कानपुर में कारवालों नगर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्तीय कार्यालय का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक परम पूजनीय डॉक्टर मोहन भागवत के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ। साथ ही साथ डॉक्टर भागवत ने संघ कार्यालय में नवनिर्मित भव्य पूज्य बाबा साहब भीमराव अंबेडकर सभागार का भी उद्घाटन किया।

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श्री महावीर जयंती – चैत्र शुक्ल त्रयोदशी

जैन तीर्थंकर

श्री महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन, वर्तमान पटना शहर के नजदीक वैशाली (बिहार) में राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिसाला के यहाँ हुआ था। उनके माता-पिता ने उनका नाम वर्धमान रखा।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की अमर संस्कृति का आधुनिक अक्षय वट है : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नागपुर, 30 मार्च। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नागपुर स्थित माधव नेत्रालय चैरिटेबल ट्रस्ट के माधव नेत्रालय के नए प्रीमियर सेन्टर के शिलान्यास समारोह में कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने निराशा में डूबे भारतीय समाज को झकझोरा, उसके स्वरूप की याद दिलाई, आत्मविश्वास का संचार किया और राष्ट्रीय चेतना को बुझने नहीं दिया।

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वर्षप्रतिपदा : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 30 मार्च

  • हिन्दू पंचांग की प्रथम तिथि को ‘प्रतिपदा’ कहा जाता है। इसमें ‘प्रति’ का अर्थ है – सामने और ‘पदा’ का अर्थ है – पग बढ़ाना। नववर्ष का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल ‘प्रतिपदा’ से ही माना जाता है और इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों का प्रारंभ गणितीय और खगोल शास्त्रीय संगणना के अनुसार माना जाता है। आज भी जनमानस से जुड़ी हुई यही शास्त्रसम्मत कालगणना व्यावहारिकता की कसौटी पर खरी उतरी है। इसे राष्ट्रीय गौरवशाली परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

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डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी

डॉ केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर में प्रतिपदा के दिन हुआ था। वर्ष प्रतिपदा को महाराष्ट्र में  ‘गुड़ीपड़वा’ के नाम से जाना जाता है। ‘यह दिन हिंदू मन, हृदय और विवेक को भारत के इतिहास के घटनाचक्र, राष्ट्र की अस्मिता, सांस्कृतिक परंपराओं एवं वीर तथा वैभवशाली पूर्वजों की विरासत का यशस्वी बोध कराता है’।[1]

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संघ शताब्दी के उपलक्ष्य में संकल्प

विश्व शांति और समृद्धि के लिए समरस और संगठित हिन्दू समाज का निर्माण

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स्वतंत्रता सेनानी महारानी अबक्का के जन्म की 500वीं वर्षगांठ के अवसर पर माननीय सरकार्यवाह जी का वक्तव्य

भारत की महान महिला स्वतंत्रता सेनानी उल्लाल महारानी अबक्का एक कुशल प्रशासक, अजेय रणनीतिकार और महापराक्रमी शासक थी। उन्होंने उल्लाल संस्थान, दक्षिण कन्नड (कर्नाटक) पर सफलतापूर्वक शासन किया था। उनके जन्म की 500वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उनकी अजेय विरासत को ह्रदय से विनम्र श्रद्धासुमन अर्पण करता है।

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