फर्रुखाबाद में धूमधाम से मनी नारद जयंती: पूर्व कुलपति बोले— ‘समाज में गलत के खिलाफ आवाज उठाने की क्षमता होनी चाहिए’

फर्रुखाबाद। नारद जयंती समारोह समिति, फर्रुखाबाद के तत्वावधान में श्याम नगर विद्या मंदिर में देवर्षि नारद जयंती कार्यक्रम अत्यंत गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। इस अवसर पर शिक्षाविदों, साहित्यकारों और प्रबुद्ध नागरिकों ने ब्रह्मांड के प्रथम संदेशवाहक देवर्षि नारद के जीवन चरित्र और उनके लोक कल्याणकारी सिद्धांतों पर गहराई से मंथन किया।

देवर्षि नारद थे सृष्टि के आदि पत्रकार: सुरेंद्र पांडे

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, संस्कार भारती के प्रांत महामंत्री एवं भारतेंदु नाट्य अकादमी के सदस्य सुरेंद्र पांडे जी ने देवर्षि नारद के जीवन वृत्त पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नारद जी केवल एक ऋषि ही नहीं, बल्कि पूरी सृष्टि के प्रथम लोक-प्रचारक और संदेशवाहक थे।

“नारद जी लोकहित की भावना से ओतप्रोत होकर पूरी सृष्टि में सतत भ्रमण करते थे। वे ब्रह्मा जी के मानस पुत्र और भगवान नारायण के अनन्य भक्त थे। उनका मुख्य उद्देश्य सूचनाओं के सही आदान-प्रदान के जरिए लोक कल्याण की स्थापना करना था।” — सुरेंद्र पांडे जी

समाज में गलत को ठीक करने की क्षमता विकसित हो: प्रो. रंगनाथ मिश्रा

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मेजर एसडी सिंह विश्वविद्यालय, फर्रुखाबाद के पूर्व कुलपति प्रो. रंगनाथ मिश्रा जी ने वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में नारद जी के विचारों की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने समाज का मार्गदर्शन करते हुए कहा:

  • सामाजिक उत्तरदायित्व: हर नागरिक को नारद जी की तरह लोकहित को सर्वोपरि मानकर समाज की बेहतरी के लिए कार्य करना चाहिए।

  • बुराइयों के खिलाफ मुखरता: जहाँ भी समाज में कुछ गलत हो रहा हो, उस पर हमारी पैनी नजर होनी चाहिए।

  • बदलाव का साहस: केवल कमियां देखना काफी नहीं है, बल्कि उस गलत को सही करने की इच्छाशक्ति और क्षमता भी हमारे भीतर होनी चाहिए।

इन्होंने संभाली व्यवस्था और मंच संचालन

इस गरिमामयी उत्सव का सफल मंच संचालन ऋषि दत्त शर्मा (गुडडू पंडित) जी द्वारा अपनी चिरपरिचित शैली में किया गया। कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में कार्यक्रम संयोजक आकाश श्रीवास्तव जी और तेजसिंह राजपूत जी की सराहनीय भूमिका रही।

शहर की प्रबुद्ध हस्तियां रहीं मौजूद

इस विशेष संगोष्ठी में कला, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ महानुभावों की उपस्थिति दर्ज की गई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से:

राजेंद्र त्रिपाठी जी, नारायण जी, राज किशोर जी, वेदराम जी, सुभाष दीक्षित जी, राम जी त्रिवेदी, गौरव मिश्रा (बंटी) जी, अरविंद दीक्षित जी, नवदीप मिश्रा जी, अमरदीप यादव जी, बंटी यादव जी, शशि भूषण यादव जी, राज किशोर यादव जी, शिवानंद जी, श्रवण कुमार जी, आशीष गुप्ता जी, अवधेश पांडे जी, अनिल प्रताप सिंह जी, कुलभूषण श्रीवास्तव जी सहित विभिन्न स्थानीय साहित्यकार और कलाकार उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में देवर्षि नारद के आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

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