कानपुर। कानपुर के जरौली में एक भव्य और वैचारिक विमर्श से परिपूर्ण ‘आचार्य पुरोहित बंधु गोष्ठी एवं सम्मान समारोह’ संपन्न हुआ। धर्म जागरण समन्वय कानपुर दक्षिण द्वारा कृष्णा फाउंडेशन एकेडमी, जरौली में आयोजित इस विशिष्ट कार्यक्रम में समाज की सामूहिक चेतना और राष्ट्र रक्षा के गंभीर मुद्दों पर गहन मंथन किया गया।

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कानपुर प्रांत प्रचारक श्रीराम जी ने समाज को मार्गदर्शित करते हुए कहा कि, “संपूर्ण विश्व को ज्ञान, आध्यात्म, और व्यापार की राह दिखाने वाला भारत कभी विश्वगुरु कहलाता था। उस स्वर्णिम काल में भारत का सर्वांगीण विकास उसकी सामूहिक शक्ति की वजह से था, जो धर्म सत्ता के रूप में समाज का नियमन करती थी।”
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि वास्तविक शक्ति किसी एक व्यक्ति या किसी विशिष्ट संगठन के भीतर सीमित नहीं होती, बल्कि वह संपूर्ण समाज की सामूहिक एकजुटता में निहित होती है। हमारी ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और पारिवारिक कुटुम्ब संस्कृति ही वह मुख्य कारण है, जिससे प्रभावित होकर आज भी दुनिया भर के विदेशी लोग सुख-शांति की खोज में भारत खींचे चले आते हैं।
जनसांख्यिकीय असंतुलन (Demographic Imbalance) पर गंभीर चिंता
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे पनकी मंदिर के महंत जितेंद्र दास महाराज जी ने अपने संबोधन में देश के सामने खड़ी समसामयिक और ऐतिहासिक चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने विभाजन और मजहबी कट्टरता का दंश झेलकर आए हिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग अपनी जान और धर्म बचाने के लिए भारत आए और यहीं शरण ली।
महंत जितेंद्र दास महाराज जी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा:
“विश्व भर में मुस्लिम और ईसाई समुदायों के पास अपने अनेक संप्रभु देश हैं, किंतु वैश्विक स्तर पर हिंदुओं के लिए एकमात्र सुरक्षित आश्रय स्थल हिंदुस्तान ही है। ऐसी स्थिति में भारत के 28 राज्यों में से 9 राज्यों में हिंदुओं की आबादी का कम होना (अल्पसंख्यक श्रेणी में आना) एक बेहद संवेदनशील और चिंतनीय विषय है।”
इस अवसर पर धर्म जागरण के प्रांत संयोजक नरेश शास्त्री जी, प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी सुरेंद्र शर्मा जी, विभाग समन्वयक शैलेंद्र जी तथा भाग संयोजक आलोक तिवारी जी ने भी समाज के एकत्रीकरण और संस्कारों के संवर्धन पर अपनी बात रखी।
160 आचार्यों एवं पुरोहितों का भव्य सम्मान
सनातन परंपरा और पूजा पद्धति को अक्षुण्ण रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आचार्यों और पुरोहितों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए इस मंच से एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
अतिथियों द्वारा क्षेत्र के कुल 160 आचार्यों और विद्वानों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाले प्रमुख प्रबुद्ध जनों में पं. राम विलास शर्मा जी, महेश चंद्र जी, उमाशंकर तिवारी जी, नरेंद्र जी, धर्मेंद्र जी, कृष्ण प्रसाद जी, रेखा अवस्थी जी, सुधा कुशवाहा जी और प्रतिका अग्रवाल जी शामिल रहीं ।
कार्यक्रम का कुशल संचालन विश्वकांत मिश्रा जी द्वारा किया गया, जबकि उपस्थित सभी अतिथियों व समाजसेवियों के प्रति आभार प्रदर्शन ओम पाठक जी ने किया। इस वैचारिक समागम में कृष्णा फाउंडेशन के चेयरमैन राज नारायण द्विवेदी जी, वीरेंद्र मिश्रा जी, राम प्रकाश जी, देवेश त्रिपाठी जी, राम बहादुर जी, रामजी हिंदू जी, विमल परिहार जी, मुनीश शुक्ला जी, योगेंद्र सचान जी तथा सुधाकर तिवारी जी सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक और मातृशक्ति उपस्थित रहे।
