गुणों का सागर थे अशोकराव मोडक – दत्तात्रेस होसबाले जी

मुंबई। प्राचार्य बी. एन. वैद्य सभागार, दादर पूर्व में तत्वचिंतक और संगठक, अभाविप के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा पूर्व विधायक श्रद्धेय स्व. डॉ. अशोकराव मोडक की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि “प्राध्यापकों का आदर्श व्यक्तित्व कैसा होना चाहिए, इसका जीवंत उदाहरण अशोकराव मोडक हैं। वे एक प्रकार से गुणों का सागर थे। संघ का विषय हो या हिन्दुत्व का विषय, उनका सभी में गहन अध्ययन था। अशोकराव विनम्रता के प्रतिमूर्ति थे”।

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सजग होकर राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य – दत्तात्रेय होसबाले जी

काशी, 24 जनवरी। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर के स्वतंत्रता भवन में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि ईश्वर की कृपा एवं अपने प्रयत्न से युवा राष्ट्र का पुनर्निर्माण करेंगे। किसान सारे प्रयत्न करता है, पर ईश्वर ने यदि वर्षा और धूप नहीं दी तो कोई लाभ नहीं होता। इसी प्रकार ईश्वर द्वारा प्रदत्त वर्षा और धूप होने के बाद भी यदि किसान प्रयत्न न करे तो अन्न नहीं पैदा हो सकता।

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समाज यदि परिवार भावना से एकजुट होकर कार्य करे, तो राष्ट्र समर्थ बनेगा – दत्तात्रेय होसबाले जी

जबलपुर, 23 जनवरी।

संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त जबलपुर की सुहागी बस्ती में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि सम्पूर्ण देश का हिन्दू समाज यदि एक परिवार की भावना से एकजुट होकर कार्य करे, तभी राष्ट्र समर्थ बनेगा। हिन्दू संस्कृति सृष्टि की प्रत्येक वस्तु में ईश्वर का दर्शन करती है और कन्या, ज्ञान व समृद्धि की पूजा करती है। ऐसी संस्कृति में भी यदि महिलाओं एवं कन्याओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की आवश्यकता पड़ती है, तो समाज को आत्ममंथन कर सुधार की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

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आदिवासी समाज और हिन्दू समाज अलग नहीं – डॉ. मोहन भागवत जी

रांची, 24 जनवरी। रांची के डीबडीह में जनजातीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया।

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निःस्वार्थ बुद्धि और ईमानदारी से देशहित में किया जाने वाला प्रत्येक कार्य संघ का ही कार्य है – डॉ. मोहन भागवत जी

राजकोट, 19 जनवरी।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आज राजकोट के सेवा भारती भवन में सौराष्ट्र-कच्छ की युवा प्रतिभाओं के साथ संवाद किया। सरसंघचालक जी ने कहा कि “जब युवा विभिन्न क्षेत्रों में देश के लिए कार्य करते हैं, तब उनके मन में ‘देश क्या है’ इसकी स्पष्ट कल्पना होनी चाहिए। अतीत में इस स्पष्ट विचार के अभाव या इसके धुंधला पड़ने के कारण ही देश गुलाम बना था। हमारा देश चैतन्यमय है, हम इसे भारत माता कहते हैं; यह केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं है। इसका विभाजन नहीं हो सकता, यह भावना से जुड़ा है”।

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‘जाति’ भेद को व्यवहार से हटाने के पहले लिए मन से निकालना होगा – डॉ. मोहन भागवत जी

प्रमुख जन संगोष्ठी में सरसंघचालक जी का प्रबुद्ध नागरिकों से संवाद

छत्रपति संभाजीनगर, 17 जनवरी 2026।

संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित प्रमुखजन गोष्ठी में उपस्थित प्रबुद्ध नागरिकों ने अपनी जिज्ञासाएँ लिखित रूप में प्रस्तुत कीं, जिनका समाधान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने विस्तारपूर्वक किया। इस अवसर पर मंच पर प्रांत संघचालक अनिल भालेराव जी उपस्थित रहे।

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संघ किसी व्यक्ति या सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करता है – दत्तात्रेय होसबाले जी

समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव राष्ट्र की एकता के लिए घातक है

दरभंगा, 17 जनवरी 2026।

संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में प्रमुखजन संगोष्ठी का आयोजन आज डीएमसीएच ऑडिटोरियम, दरभंगा में किया गया। इस अवसर पर सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रबुद्धजनों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की सहभागिता रही।

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प्रौद्योगिकी का उपयोग समाजहित में होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

छत्रपति संभाजीनगर, 17 जनवरी 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने युवा उद्यमी संवाद में कहा कि प्रौद्योगिकी आज की अपरिहार्य आवश्यकता है। स्वदेशी का उपयोग करने का अर्थ प्रौद्योगिकी का त्याग करना नहीं है, किंतु हमें प्रौद्योगिकी का दास नहीं बनना चाहिए। हम उद्योग केवल अपने लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के लिए करते हैं।

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भारत के अच्छे भविष्य के लिए हिन्दू समाज जिम्मेदार है – डॉ. मोहन भागवत जी

गंगापुर, छत्रपति संभाजीनगर (16 जनवरी 2026)।

हिन्दू धर्म, परंपरा, संस्कृति और मूल्यों की रक्षा हेतु  हिन्दू सम्मेलन समिति, गंगापुर ने भव्य “हिन्दू सम्मेलन” का आयोजन किया। हिन्दू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमें एक ऐसा बलशाली और चरित्रवान समाज बनाना है, जिससे दुनिया भी प्रभावित हो। इसके लिए हमें अपना स्वभाव और आचरण बदलना होगा। हिन्दू समाज ही भारत के अच्छे भविष्य के लिए ज़िम्मेदार है। इसलिए अच्छा परिवर्तन चाहिए तो स्वयं से शुरू करना होगा। उन्होंने पंच परिवर्तन का विषय सम्मेलन में उपस्थित समाज के समक्ष रखा।

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विदेश जाकर ज्ञान प्राप्ति करें, लेकिन उसका उपयोग भारत के लिए करें – डॉ. मोहन भागवत जी

छत्रपति संभाजीनगर, 16 जनवरी।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी छत्रपति संभाजीनगर के दो दिन के प्रवास पर हैं। उन्होंने संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित ‘युवा सम्मेलन’ में युवाओं से संवाद किया। सरसंघचालक जी ने कहा कि “भारत के विकास में युवाओं का योगदान ज़रूरी है। ज्ञान पाने के लिए विदेश जाने में कुछ गलत नहीं है, लेकिन उस ज्ञान का इस्तेमाल भारत के लिए किया जाना चाहिए। हमारे देश का भविष्य बनाने में युवाओं की ज़िम्मेदारी ज़रूरी है। आज का युवा देशभक्त है। युवाओं में देशभक्ति जितनी ज़्यादा होगी, वे देश के लिए उतना ही ज़्यादा काम करेंगे”। कई लोगों ने देश के फ़ायदे के लिए अपने ज्ञान और कुशलता का इस्तेमाल करने के लिए संघ के साथ काम किया है। संघ किसी से स्पर्धा नहीं करता, और किसी का विरोध भी नहीं करता। संघ बलशाली समाज निर्माण करना चाहता है। युवाओं से इस कार्य में अपना योगदान देने का आह्वान किया।

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