जम्मू कश्मीर अधिमिलन – 26 अक्टूबर 1947
1947- नेहरू के चलते जम्मू-कश्मीर का अधिमिलन खतरे में था, लेकिन सरदार पटेल ने इसको संभव कर दिखाया
सरदार पटेल के लिए कहा जाता है कि वे जम्मू और कश्मीर का भारत में अधिमिलन नहीं चाहते थे। जबकि दस्तावेजों के अनुसार सरदार पहले व्यक्ति थे जिन्होंने इस रियासत को भारत में शामिल करने की पहल की थी। यही नहीं, उन्होंने अधिमिलन को पुख्ता करने के लिए भी हरसंभव प्रयास किये थे। सरदार ने 3 जुलाई, 1947 को महाराजा हरि सिंह को एक पत्र लिखा और खुद को राज्य का एक ईमानदार मित्र एवं शुभचिंतक बताया। साथ ही महाराजा को आश्वासन दिया कि कश्मीर का हित, किसी भी देरी के बिना, भारतीय संघ और उसकी संविधान सभा में शामिल होने में निहित है।
प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चम्पत राय जी ने निर्माण कार्य के बारे में जानकारी प्रदान की
अयोध्या में आयोजित अखिल भारतीय शारीरिक वर्ग के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने 21 अक्तूबर को श्रीराम लला के दर्शन कर आशीर्वाद लिया तथा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्य का भी अवलोकन किया.
श्रद्धा, प्रेम, समर्पण …
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हिन्दू समाज के पास हो मंदिरों के संचालन की जिम्मेदारी : विहिप
भोपाल. विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि हिन्दू मंदिरों का संचालन पूरे तरीके से हिन्दू समाज को करना चाहिए, सरकारी कब्जे से मंदिरों को मुक्ति मिलनी चाहिए. शुक्रवार को भोपाल में पत्रकार वार्ता के दौरान परांडे ने कहा कि मंदिरों के साथ मंदिरों की संपत्ति का वहां आए हुए दान का उपयोग हिन्दुओं के लिए ही हो. मंदिर के रखरखाव के लिए तथा धार्मिक प्रचार के लिए इस दान का उपयोग किया जाए. विश्व हिन्दू परिषद इसके लिए समाज जागरण और कानूनी तौर पर न्यायालय में भी प्रयास करेगा. पढ़ना जारी रखें “हिन्दू समाज के पास हो मंदिरों के संचालन की जिम्मेदारी : विहिप”
सुकमावती इस्लाम छोड़ बनेंगी हिन्दू
अयोध्या में मंदिर की दीवारों से आएगी श्रीराम धुन, बिजली के तारों का नहीं होगा इस्तेमाल..
अयोध्या में चल रहे राम मंदिर निर्माण दुनिया में सबसे खूबसूरत मंदिर होगा। जो तकनीकी रूप से भी सबसे बेहतर होगा। मंदिर निर्माण समिति से जुड़े सदस्यों की मानें तो श्रीराम जन्मभूमि परिसर में भगवान श्रीराम के भव्य निर्माण में वैदिक विधि ही नहीं बल्कि हाइटेक आइकोनोग्राफी सिस्टम से भी लैस किया जाएगा। मंदिर निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा और ट्रस्ट के साथ हुई बैठक में कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों को लिया गया। मीडिया से बातचीत के दौरान चंपत राय ने कहा कि आने वाले समय में श्रीराम मंदिर जैसा राम मंदिर विश्व में कहीं दूसरा देखने को नहीं मिलेगा।
मंदिर मे अंदर और बाहर बिना तारों के होगी बिजली व्यवस्था….चंपत राय ने बताया कि मंदिर प्रांगण में बिजली व्यवस्था को बिना तारों के बनाने पर विचार हुआ है। साथ ही हाई मास्क लाइट के बजाए आँखों में सुकून पहुंचे ऐसी लाइट का प्रयोग होगा। मंदिर प्रांगण के बाहर से ही राम धुन हल्की हल्की गूंजने लगेगी। हवा में भी श्रीराम सीता से ध्वनि गूँजती रहेगी। मंदिर की दीवारों पर, सभी स्तंभों पर, प्लिंथ पर भी देश के विभिन्न ग्रंथों के मुताबिक देवी-देवताओं की मूर्तियों को उभारा जाएगा।
नवंबर के अंतिम सप्ताह से प्लिंथ निर्माण शुरू….चंपत राय ने बताया कि भगवान राम के मंदिर में आधुनिक सिस्टम को लेकर बनाए जाने के लिए मंदिर निर्माण समिति व राम जन्मभूमि टेस्ट की तीन दिवसीय बैठक बुलाई गई थी। जिसमें मंदिर परिसर में ध्वनि सिस्टम, लाइट सिस्टम, मूर्तियों का विजूलाइजेशन को लेकर लंबी बातचीत हुई। नवंबर के अंतिम सप्ताह से प्लिंथ निर्माण के लिए भी कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।

