विहिप का केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल तिरुपति मंदिर प्रसाद वितरण पर करेगा बैठक

नई दिल्ली। सितम्बर 22, 2024। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक सोमवार को तिरुपति में बुलाई गई है। इस बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए विहिप के अंतर्राष्ट्रीय महा मंत्री श्री बजरंग बागड़ा ने बताया कि आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के पूज्य संतों की इस बैठक में हिंदू समाज के समक्ष खड़ी चुनौतियों और उनके समाधानों पर मंथन किया जायेगा। तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में मिलावट व उससे उत्पन्न स्थित पर भी विचार होगा।

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जनजाति समाज के पर्व-त्यौहार व पूजा पद्धति सनातनी परंपरा से मिलते हैं

समालखा. अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के समालखा (हरियाणा) में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के तीसरे दिन 22 सितंबर को प्रथम सत्र का शुभारंभ अरुणाचल प्रदेश की स्थानीय भाषा में प्रार्थना से हुआ. जिसका भावार्थ यही था कि सबका कल्याण हो.

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वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय कार्यकर्ता सम्मेलन ‘समवेत – 2024’ का हुआ शुभारंभ

समालखा. जनजाति समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयासरत अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यकर्ता सम्मेलन का उद्घाटन 20 सितंबर को हरियाणा के सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र, समालखा में गुजरात के प्रसिद्ध भागवत कथाकार पूज्य रमेशभाई ओझा के करकमलों से हुआ.

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धर्म का ज्ञान वेदों से आता है क्‍योंकि वेदों का मूल सत्‍य में है- पूजनीय सरसंघचालक जी

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हमें छुआछूत के भाव को पूरी तरह मिटा देना है : डॉ. मोहन भागवत

अलवर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हम अपने धर्म को भूलकर स्वार्थ के अधीन हो गए, इसलिए छुआछूत चला. ऊंच-नीच का भाव बढ़ा, हमें इस भाव को पूरी तरह मिटा देना है. जहां संघ का काम प्रभावी है. संघ की शक्ति है, वहां कम से कम मंदिर, पानी, शमशान सब हिन्दुओं के लिए खुले होंगे, यह काम समाज का मन बदलते हुए करना है. सामाजिक समरसता के माध्यम से परिवर्तन लाना है. उन्होंने स्वयंसेवकों से सामाजिक समरसता, पर्यावरण, कुटुम्ब प्रबोधन, स्व का भाव और नागरिक अनुशासन इन पांच विषयों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि जब इन बातों को स्वयंसेवक अपने जीवन में उतारेंगे, तब समाज भी इनका अनुसरण करेगा.

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डॉ. मोहन भागवत ने धरमपेठ महिला स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी सभागार में श्री गुरुजी के तैलचित्र का किया अनावरण

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि पूज्य गुरुजी के सारे काम धर्म के विश्लेषण से चलते थे, संघ का काम भी उसी प्रकार से चलता है. अपना समाज संगठित ही रहना चाहिये. आपसी सहयोग से हमें समर्थ होना पड़ेगा और समाज को भी समर्थ बनाना पड़ेगा. हम जो कुछ करते हैं, वह धर्म है. उसे निष्ठा और प्रामाणिकता से स्वीकारना होगा.

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक, पालक्काड, केरल – 31 अगस्त 2024

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक केरल के पालक्काड में आरम्भ हुई। यह बैठक 2 सितंबर तक चलेगी। इस अखिल भारतीय समन्वय बैठक में पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत, माननीय सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले सहित संघ के सभी छह सह सरकार्यवाह और अन्य अखिल भारतीय पदाधिकारी उपस्थित हैं।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक 31 अगस्त, 1-2 सितंबर 2024 को केरल के पालक्काड में होगी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक इस वर्ष केरल के पालक्काड में 31 अगस्त एवं 1 तथा 2 सितंबर 2024 को आयोजित हो रही है। तीन दिवसीय यह अखिल भारतीय बैठक सामान्यतः वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है। पिछले वर्ष यह बैठक सितंबर 2023 में पुणे में संपन्न हुई थी। इस अखिल भारतीय समन्वय बैठक में संघ प्रेरित विविध संगठनों में कार्यरत संगठन के प्रमुख पदाधिकारी सहभागी होते हैं। यह सभी संगठन समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के सकारात्मक कार्यों में लोकतांत्रिक पद्धति से सामाजिक परिवर्तन के कार्य में सक्रिय रहते है।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक 31 अगस्त-1-2 सितंबर 2024 को केरल के पालक्काड में

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक इस वर्ष केरल के पालक्काड में इस माह दिनांक 31 अगस्त एवं 1 तथा 2 सितंबर 2024 को आयोजित हो रही है। तीन दिवसीय यह अखिल भारतीय बैठक सामान्यतः वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है। पिछले वर्ष यह बैठक सितंबर 2023 में पुणे में संपन्न हुई थी। इस अखिल भारतीय समन्वय बैठक में संघ प्रेरित विविध संगठनों में कार्यरत संगठन के प्रमुख पदाधिकारी सहभागी होते हैं। यह सभी संगठन समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के सकारात्मक कार्यों में लोकतांत्रिक पद्धति से सामाजिक परिवर्तन के कार्य में सक्रिय रहते है।

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‘अथातो बिंब जिज्ञासा’ विवेक जगाने वाला ग्रंथ : डॉ. मोहन भागवत

पुणे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि वर्तमान में विश्व विभिन्न मार्गों पर लड़खड़ा रहा है, रुका हुआ है. उसे भारत की परंपराओं से प्राप्त ज्ञान की आवश्यकता है. वह हमारे ज्ञान, भक्ति और कर्म के त्रिवेणी संगम से दिखा सकते हैं. वह दृष्टि देने का कार्य डॉ. देगलूरकर के ग्रंथ के माध्यम से हुआ है. ‘अथातो बिंब जिज्ञासा’ ग्रंथ विवेक जगाने वाला ग्रंथ है.

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